जीरकपुर। जैन सभा जीरकपुर में साध्वी मधुरता महाराज ने बताया कि क्रोध विष के समान है। एक पागलपन है। क्रोध कुरूप, हिंसकारी, अंधा, बहरा, जीवन का सर्वनाश करने वाला घातक तत्व है। इसके घेरे, चंगुल में जो भी आता है, उसके जीवन का आनंद अशांति, तनाव एवं समस्या से ग्रस्त हो जाता है। बड़े-बड़े ऋषि मुनि भी इसके जाल में फंस जाने से नरक के मेहमान बन जाते हैं। क्रोध करना बहादुरी नहीं कायरता है। क्रोध में व्यक्ति कभी-कभी इतना भयंकर अनर्थ कर गुजरता है कि जब उसे होश आता है तब अपने किए कार्य पर पश्चाताप करता है, दुखी हो जाता है। अपने जीवन में अगर आनंद और शांति चाहते हैं तो इस क्रोध से बचें।