मोहाली। थीन डैम के जमीन अधिग्रहण मामले में अदालत ने सभी 19 आरोपियों को बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष जमीन रिकॉर्ड में हेराफेरी, सरकारी मिलीभगत और अधिक मुआवजा लेने की साजिश के आरोप साबित नहीं कर सका।
मामले का मुख्य विवाद राजस्व रिकॉर्ड में जमीन के रकबे का था। अभियोजन के अनुसार, असल रकबा 1,938 कनाल था, जो 1967-68 में कथित तौर पर 10,938 कनाल दर्ज हुआ। इससे करीब 9 हजार कनाल अतिरिक्त जमीन दर्ज हुई। बचाव पक्ष ने दो दशक के अंतर को आधार बनाया। उनका तर्क था कि गड़बड़ी 1967-68 में हुई, जबकि अधिग्रहण 1987 में शुरू हुआ। आरोपियों को भविष्य के अधिग्रहण की जानकारी का कोई आधार नहीं था। इंद्रजीत सिंह, चमन सिंह सहित 19 लोग आरोपी थे। अभियोजन पक्ष ने कुल 84 सरकारी गवाह पेश किए।
रिकॉर्ड और अनुवाद पर सवाल
मुख्य जांच अधिकारी ने जिरह में माना, कुछ आरोपियों का जन्म 1967 के बाद हुआ था। बचाव पक्ष ने 1967-68 की कोई मूल उर्दू जमाबंदी पेश नहीं की। गवाह मोहन लाल ने उर्दू भाषा की जानकारी न होने की बात कही। संबंधित रिकॉर्ड में 1967-68 की जमाबंदी पंजाबी में थी। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आपराधिक साजिश साबित नहीं कर पाया।