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आधुनिक तकनीकों से चुनौती भरा बना ऐरोस्पेस क्षेत्र : सुखचैन सिंह

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मोहाली। ऐरोस्पेस क्षेत्र आधुनिक तकनीकों के चलते चुनौतीभरा है। इसके अंतर्गत क्षेत्र के प्रोजेक्टों, साधनों का ढांचें और उन की बारीकियें को अच्छी तरह समझना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह बात पूर्व एअरमारशल सुखचैन सिंह ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूंआं में ऐरोसपेस इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से उत्तर भारत के पहले ऐरोस्पेस इंजीनियरिंग कम्पीटिशन स्पेसफीलिया-2019 के दौरान कही। समागम के दौरान विद्यार्थियों के कई मुकाबले करवाए गए जिसमें देश की 32 संस्थाओं से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने मुकाबलों में भाग लिया। इस दौरान विद्यार्थियों को ऐरोस्पेस इंजीनियरिंग क्षेत्र में आधुनिक खोज, तकनीकों के बारे में जानकारी देने के लिए ऐरोस्पेस इंजीनियरिंग रिसर्च पर नेशनल कान्फ्रेंस का आयोजन भी किया गया।
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सुखचैन सिंह ने कहा कि यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थाओं में तकनीकी युग का प्रतिनिधित्व करते सेमिनारों, मुकाबलों के दौरान विद्यार्थियों को आज के समय में टेक्नालोजी, रिसर्च, आधुनिकता आदि क्षेत्र में चुनौती भरे जिंदगी के पड़ावों के बारे में जानकारी हासिल करने की सूझ और दिशा मिलती है। आज देश के वैज्ञानिकों का मुख्य उद्देश्य ऐरोस्पेस विज्ञान क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का विकास करना है जिससे विभिन्न क्षेत्रों में आ रही मुश्किलों का हल आसानी के साथ किया जा सके। उन्होंने कहा कि ऐरोस्पेस एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें हर पल कीमती और चुनौती भरा है। मानवीय साधनों के सही प्रयोग के लिए भारी भरपूर प्रौद्योगिकी को अपनाना समय की जरूरत है। पहले दिन विद्यार्थियों ने ऐरोस्पेस क्षेत्र के साथ संबंधित प्रोजेक्टों की प्रदर्शनी भी लगाई। इसमें चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने कुल 63 माडलों, प्रोजेक्टों को प्रदर्शित किया जिसमें आरसी एअरक्राफ्ट, मिग-21 माडल, स्पेस स्टेशन माडल, फोर्स संतुलन माडल, लिफ्ट जेनरेशन एयर गुब्बारे, रॉकेट बुग्गी मैकेनिकल माडल, एयर एंबुलैंस, फाइटर एअरक्राफ्ट, एयर टैक्सी, मिलिट्री कार्गो, 20 सीटर एअरक्राफ्ट और बिजनेस जेट प्रोजेक्टों की पेशकारी भी दी गई।
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