मोहाली। धान की कटाई का समय नजदीक आते ही मोहाली जिला प्रशासन पराली प्रबंधन को लेकर सक्रिय हो गया है। डीसी कोमल मित्तल की अध्यक्षता में हुई बैठक में बेलर ऑपरेटरों और पराली का उपयोग करने वाली निजी फर्मों को बुलाया गया। बैठक का फोकस इस बार सिर्फ नियम बनाने पर नहीं, बल्कि जमीनी समस्याओं के समाधान पर रहा। बैठक में बेलर मालिकों ने कहा कि खेतों से पराली की गांठें बनाकर जब वे आगे सप्लाई करने जाते हैं तो उन्हें कई अड़चनें झेलनी पड़ती हैं। खराब सड़कें, बिजली की झूलती तारें, टोल प्लाजा पर रोका जाना और बीमा न होने की वजह से स्टोर की गई पराली में आग लगने पर भारी नुकसान होता है। डीसी ने इन शिकायतों को तत्काल सभी संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए। उन्होंने बिजली विभाग को तारों की मरम्मत, पीडब्ल्यूडी को सड़क सुधारने और टोल प्रबंधन को बेलर वाहनों को पास जारी करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, पराली खरीदने वाली फर्मों को भी स्पष्ट कहा गया कि वे बेलर ऑपरेटरों के साथ मिलकर पराली बीमा की व्यवस्था सुनिश्चित करें। बैठक में यह भी तय किया गया कि गांव स्तर पर बेलर ऑपरेटरों की सूची तैयार की जाएगी, जिससे यह पता चल सके कि कहां से कितनी पराली उठनी है और कहां सप्लाई जानी है। इसके लिए मुख्य कृषि अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन ने पराली प्रबंधन से जुड़े सभी अधिकारियों और विभागों का एक समर्पित व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का भी फैसला लिया है ताकि ग्राउंड से तुरंत सूचना मिल सके और त्वरित कार्रवाई की जा सके। बैठक में एडीसी विकास सोनम चौधरी, मुख्य कृषि अधिकारी गुरमेल सिंह, डीएसपी (मुख्यालय) हरसिमरत सिंह, जिला विकास अधिकारी परमवीर कौर, और सहकारिता विभाग के अधिकारी भी शामिल रहे।