मोहाली। शहर और आसपास के शहरी इलाकों में पीने के पानी की गुणवत्ता को बेहतर और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मोहाली के सेक्टर-79 स्थित वाटर वर्क्स में राज्यस्तरीय वाटर क्वालिटी टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएगी। इस प्रयोगशाला के लिए नगर निगम मोहाली जमीन उपलब्ध कराएगा, जबकि इसका निर्माण और संचालन पंजाब वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड करेगा। नगर निगम हाउस की बैठक में कमिश्नर परमिंदर पाल सिंह ने बताया कि स्थानीय निकाय विभाग के पास फिलहाल अपनी कोई समर्पित वाटर टेस्टिंग लैब नहीं है। अभी तक पानी की जांच जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग की प्रयोगशालाओं में कराई जाती रही है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और अन्य अदालतों में जल गुणवत्ता से जुड़े मामलों के कारण इन लैब्स पर कार्यभार काफी बढ़ गया है। इसको देखते हुए नई आधुनिक प्रयोगशाला की जरूरत महसूस की गई। यह लैब अमृत 2.0 योजना के तहत स्थापित की जाएगी। स्थानीय निकाय विभाग की ओर से प्रस्तावित चार वाटर टेस्टिंग लैब्स में से एक मोहाली के सेक्टर-79 में बनेगी। लगभग पांच हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाली यह प्रयोगशाला राज्यस्तर पर काम करेगी और नगर निगमों, नगर परिषदों, नगर पंचायतों सहित सभी शहरी स्थानीय निकायों की जरूरतों को पूरा करेगी। प्रस्तावित लैब में पानी की भौतिक, रासायनिक, बैक्टीरियोलॉजिकल, वेस्ट वॉटर और हैवी मेटल से जुड़े सभी महत्वपूर्ण परीक्षण किए जा सकेंगे। इससे आम लोगों तक सुरक्षित और मानक के अनुरूप पीने का पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी।
वाटर टेस्टिंग लैब से आम लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
प्रस्तावित वाटर टेस्टिंग लैब से आम जनता को कई महत्वपूर्ण फायदे होंगे। इस प्रयोगशाला के स्थापित होने से पीने के पानी की गुणवत्ता की नियमित और वैज्ञानिक जांच संभव हो सकेगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि लोगों तक पहुंचने वाला पानी स्वास्थ्य मानकों पर खरा उतरता है। लैब के माध्यम से पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों की समय रहते पहचान होगी, जिससे दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। इसके अलावा, पानी की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों का त्वरित निपटारा किया जा सकेगा और जांच रिपोर्ट में पारदर्शिता बनी रहेगी।