जीरकपुर। पीरमुछल्ला के एक निजी अस्पताल में ब्लॉक पड़े सीवरेज को खोलने के लिए मैनहोल में उतरे श्रमिक की गैस चढ़ने के बाद दम घुटने से मौत हो गई। घटना शुक्रवार दोपहर साढ़े तीन बजे की है। मृतक की पहचान श्रवण (46) के रूप में हुई है। वह प्लंबर का काम करता था और पीरमुछल्ला की झुग्गियों में रहता था। वह मूलरूप से कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला था। अस्पताल प्रबंधन मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं। ढकौली पुलिस ने 174 की कार्रवाई कर शव का पंचकूला सेक्टर-6 के सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया और उसे परिजनों को सौंप दिया। उधर, परिजनों का आरोप है कि मैनहोन में आने-जाने के लिए बनाए गए लोहे के एंगल में हाथ फंसने के कारण सीवरेज के गंदे पानी में डूबने से श्रवण की मौत हुई है। परिजनों ने शनिवार को शव का अंतिम संस्कार कर दिया। श्रवण के तीन बेटे और एक बेटी है।
हैरानी की बात यह है कि ब्लॉक पड़े सीवरेज को खोलने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने सीवरमैन को बुलाने की जगह अनट्रेंड प्लंबर को मैनहोल में उतार दिया। उसे अस्पताल के बाथरूम की पॉट (सीट) को ठीक करने के लिए बुलाया गया था। बाद में उसे अस्पताल प्रबंधकों ने मैनहोल में उतार दिया। मृतक श्रवण के भांजे जतिंदर चौहान ने आरोप लगाया कि उसके मामा की मौके पर ही मौत हो गई थी लेकिन अस्पताल प्रबंधकों ने झूठ बोला कि उनकी सांसें चल रही हैं। वह उन्हें तुरंत पंचकूला सेक्टर-6 के सरकारी अस्पताल ले जाए।
आरोप है कि पंचकूला जाने से पहले अस्पताल प्रबंधक श्रवण को बेसमेंट ले गए और बाहर से शटर बंद कर दिया। जतिंदर ने आरोप लगाया प्रबंधकों ने उन सभी के मोबाइल तक अपने पास रख लिए। कुछ देर बाद अस्पताल प्रबंधक बाहर आए और उन्हें बिना एंबुलेंस व प्राथमिक उपचार दिए ऑटो से सेक्टर-6 के सरकारी अस्पताल भेज दिया। जब वह अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने बताया कि श्रवण की मौत हो चुकी है। मामा की मौत की खबर सुनते ही जतिंदर चक्कर खाकर गिर पड़ा, जिससे उसके सिर पर गहरी चोट आई। उसके सिर पर तीन टांके लगे हैं।
2500 रुपये देने की बात कहकर मैनहोल में उतारा
श्रवण अपने भांजे जतिंदर चौहान व एक अन्य साथी जोगिंदर सिंह को साथ लेकर अस्पताल में पॉट ठीक करने पहुंचा था। अस्पताल प्रबंधकों ने श्रवण से शौचालय की सीट ठीक करवाई और कहा कि उनके अस्प्ताल का सीवरेज ब्लॉक रहता है, वह उसे भी ठीक कर दे। इसके लिए 2500 रुपये देने की बात कही। कहा गया कि अगर सीवरेज पूरी तरह से ठीक हो जाएगा तभी रुपये मिलेंगे। जतिंदर के मुताबिक, श्रवण ब्लॉक पड़े सीवरेज को ठीक करने के लिए मैनहोल में उतर गया। अंदर से दो बार वह सीवर के पाइप में फंसीं बोरियां निकाल लाया लेकिन तीसरी बार जब वह अंदर उतरा तो वापस नहीं लौटा। जब वह बाहर नहीं आया तो भांजा जतिंदर अंदर गया। उसने बताया कि श्रवण की बाजू वहां लोहे के एंगल में फंसी है। वह उसे बाहर निकालकर ले या लेकिन वह बेसुध हो चुका था। परिवार का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधकों ने जानबूझ कर उसे पैसों का लालच देकर जबरन सीवरेज की सफाई के लिए गहराई में उतारा।
मृतक का पोस्टमार्टम करवा दिया गया है। विसरा सुरक्षित करवाया गया है। सोमवार को विसरा खरड़ व मोहाली फेज-6 अस्पताल भेजा जाएगा। विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असल कारणों का पता चलेगा। फिलहाल 174 की कार्रवाई की गई है। प्राथमिक जांच में श्रवण की मौत गैस चढ़ने से नहीं बल्कि बाजू के लोहे के एंगल में फंसने से मौत हुई है।
- मेवा सिंह, जांच अधिकारी व एएसआई, ढकौली थाना