मोहाली। शहर के पूर्व पार्षदों ने नगर निगम बहाल किए जाने के हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। साथ ही सरकार से मांग की है कि दूसरे नगर निगमों की तरह यहां भी अधिकार और आमदनी के साधन दिए जाएं, तभी नगर निगम बनाने का फायदा लोगों को मिलेगा। फिलहाल यहां सारा काम गमाडा के पास है।
पूर्व पार्षद कुलजीत बेदी ने कहा कि निगम बनने से विकास तेज होगा। शहर को ए-क्लास सिटी का दर्जा मिल सकेगा, लेकिन यह तभी संभव है जब गमाडा से कुछ अधिकार लेकर नगर निगम को दिए जाएं। दूसरे शहरों में भी ऐसा ही होता है। शहर में आमदनी का सबसे बड़ा सोर्स नक्शा फीस है। दूसरे शहरों में यह फीस नगर निगम वसूलती हैं। लेकिन यहां यह अधिकार गमाडा के पास है। इसी तरह वाटरसप्लाई, सीवरेज आदि के काम भी नगर निगम के पास नहीं है। मौजूदा नगर निगम (काउंसिल) द्वारा जो अगले वित्त वर्ष का बजट पिछले दिनों पास किया गया था, उसमें कुल आमदनी 5184.70 लाख रुपये है। जबकि, खर्च 5101.69 लाख रुपये है। दूसरे निगमों का बजट कई सौ करोड़ रुपये है। मोहाली निगम की आमदनी के मुख्य सोर्स विज्ञापन, तहबाजारी आदि हैं। पूर्व पार्षदों का मानना है कि निगम के लिए सरकार को आमदनी के साधन बढ़ाने होंगे और बजट भी बढ़ाना होगा।
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चुनाव में लगेगा वक्त
हाईकोर्ट ने मोहाली नगर निगम को बेशक बहाल कर दिया है। लेकिन पार्षद और मेयर बनने की जद्दोजहद में लगे लोगों को अभी काफी इंतजार करना होगा। क्योंकि सबसे पहले निगम की नए सिरे से हदबंदी होगी। हद तय करने के बाद ऐतराज मांगे जाएंगे, फिर नोटिफिकेशन होगी। उसके बाद वार्डबंदी की जाएगी और उसकी भी पूरी प्रक्रिया होगी। फिर चुनाव की बारी आएगी। इस सारी प्रक्रिया में काफी वक्त लगेगा। पंजाब के कई निगम इस बात के गवाह हैं कि निगम बनने के कई साल बाद ही वहां चुनाव हुए थे। मोहाली भी फिलहाल अफसरों के रहमो-करम पर ही रहने की उम्मीद है।