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मरहम तो लगा, पर नहीं भर सकते जख्म

Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
Mohali
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मोहाली। करीब चार साल पहले 26/11 हमले ने जो जख्म दिए थे, कसाब की फांसी से उन पर कुछ मरहम तो लगा मगर टीस तो बनी रहेगी। उस हमले में जिन परिवारों ने अपने परिजनों को खो दिया उनका कहना है कि फांसी की सजा से इंसाफ तो जरूर मिला मगर जिगर के टुकड़े वापस नहीं मिलेंगे। शहर के दो परिवार आतंकवाद के इस दर्द को ताउम्र झेलेंगे। ताज होटल के तत्कालीन जीएम करमबीर सिंह कंग लोगों को बचाते रहे और उनकी पत्नी व दो बेटे आतंकियों की गोलियों का शिकार हो गए। वहीं फेज नौ निवासी आईटीबीपी के डीआईजी एमएस भुरजी की बेटी जासमीन भी हादसे में छिन गई थी।
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हमले के समय होटल ताज के जीएम रहे करमबीर सिंह के पिता रिटायर्ड मेजर जनरल जगतार सिंह कंग व माता कमलजीत कौर कंग बुधवार को कंडाला स्थित अपने फार्म हाउस पर ही मौजूद थे। इस दौरान जगतार सिंह ने कहा कि फांसी से उन्हें इंसाफ तो मिला है। हालांकि फांसी देने में काफी देरी हो गई। कसाब से जब पूछताछ पूरी हो गई थी। उसे उसी समय फांसी देनी चाहिए थी। जिगर के टुकड़ों के जाने का दुख हमेशा रहेगा। इस जख्म को कोई भी मरहम नहीं भर पाएगा। इस दौरान हमले में खोए अपने बच्चों की फोटो देख दोनों भावुक हो गए। फोटो देख उनकी आंखू से आंसू निकल आए। फेज-10 निवासी व करमबीर सिंह कंग के मौसा बीएस बैंस अपने लॉन में बैठ कर नावल पढ़ रहे थे। कसाब को फांसी का जिक्र होते ही वह भावुक हो उठे। उन्होंने कसाब की फांसी पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि कसाब को मारने से आतंकवाद खत्म नहीं हो जाएगा, वह तो सिर्फ प्यादा था। इसके लिए हमें पाकिस्तान में बैठे बड़े आतंकियों को खत्म करना होगा। बैंस ने कहा कि इसके लिए दोनों मुल्कों सरकारों को आगे आना होगा।


जासमीन के घर में पसरा रहा सन्नाटा
मुंबई हमले के दौरान होटल ताज में बतौर ट्रेेनी काम कर रही फेज-9 निवासी जासमीन की भी मौत हो गई थी। बुधवार को कसाब को फांसी की खबर के बाद उस घर में सन्नाटा पसरा था, जहां कभी जासमीन चहकती थी, खुशियां महकती थीं। जासमीन के पिता आईटीबीपी के डीआईजी एमएस भुरजी आजकल दिल्ली में हैं।
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