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कुलदीप सिंह चांदपुरी के बेटे का इंटरब्यू

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वो वापिस आएंगे और सम्मान भी लाएंगे
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- ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी के बेटे ने शेयर की युद्ध के दिनों की बातें
- पिता की सता रही थी चिंता, ऐसे में नाना ने ज्योतिष से जानना चाहा था उनका भविष्य
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। हम गर्व करते हैं उन सैनिकों की बहादुरी पर, जिनकी वीरता ने देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने न सिर्फ दुश्मन के दांत खट्टे किए, बल्कि आने वाली पीढ़ी को एक सम्मानजनक इतिहास दिया। हमारे सैनिक जब मोर्चे पर होते हैं तो पीछे परिवार उनका इंतजार कर रहा होता है। वो चिंतित होते हैं उस बहादुर के लिए जिसकी चिंता देश के लिए होती है। महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी भी 1971 में जब लोंगोवाल पोस्ट पर तैनात थे तो उनका परिवार भी चिंतित था। चांदपुरी के बेटे हरदीप सिंह ने कुछ निजी पारिवारिक बातों को अमर उजाला के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि बात तब की है जब युद्ध के माहौल में उनके पिता लोंगोवाल पोस्ट पर तैनात थे। आपातकालीन हालात में सैनिकों की तैनाती की सूचना सार्वजनिक नहीं की जाती। लिहाजा परिवार को भी पता नहीं था कि चांदपुरी कहां तैनात हैं। अखबारों और रेडियो पर आ रही भारत-पाक युद्ध की खबरों ने परिवार की चिंता बढ़ा दी थी और चांदपुरी की कोई खैर खबर नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में कुरुक्षेत्र के ज्योतिष जोकि उनके नाना के घर नियमित रूप से आते थे, उनसे उनकी मां ने चांदपुरी की कुशलता के बारे में जानना चाहा। उन्होंने ज्योतिष गणित के हिसाब से बताया कि कुलदीप सिंह चांदपुरी न सिर्फ सकुशल वापिस आएंगे बल्कि उन्हें कोई बड़ा सम्मान भी मिलेगा। उनकी बात सही साबित हुई और कुलदीप सिंह चांदपुरी न सिर्फ विजेता बनकर लौटे बल्कि उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित भी किया गया।

...जब मंत्री की सहायता लेने से कर दिया था अस्वीकार
हरदीप सिंह अपने पिता से जुड़ी एक घटना का जिक्र करते हुए उसे अपने लिए यादगार बताते हैं। हरदीप ने बताया कि बात वर्ष 1994 की है। वह आस्ट्रेलिया जाना चाहते थे और उनका वीजा रिजेक्ट हो गया था। इन्हीं दिनों उनके पिता के सम्मान में एक तत्कालीन मंत्री ने रात्रि भोजन दिया था। इसमें कुलदीप सिंह परिवार सहित शिरकत करने पहुंचे। अनौपचारिक बातचीत के दौरान मंत्री ने हरदीप सिंह से भविष्य की योजना के बारे में पूछा तो हरदीप सिंह ने बताया कि वह आस्ट्रेलिया जाकर अपना कैरियर बनाना चाहते हैं, लेकिन उनका वीजा रिजेक्ट हो गया है। इस पर मंत्री ने हरदीप से उनका पासपोर्ट मांगा। हरदीप पासपोर्ट देने लगे तो कुलदीप ने मंत्री का धन्यवाद करते हुए विनम्रता से उनकी सहायता लेना अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि इनमें योग्यता होगी तो ही यह जाएगा।
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ड्रग्स युवाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा
हरदीप सिंह अपने पिता को याद करते हुए कहते हैं कि वह इमानदारी और समर्पण पर जोर देते थे। अपने पिता की शिक्षा और मौजूदा हालात के परिपेक्ष्य में हरदीप सिंह का कहना है कि आज ड्रग्स युवाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसके लिए अभिभावक भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। आज अभिभावक अपने बच्चों के लिए बड़े पैकेज की होड़ में लगे हैं और उसे अपना स्टेटस सिंबल बना चुके हैं। इसका दबाव युवाओं पर पड़ रहा है और उनकी मौलिक प्रतिभा खत्म होती जा रही है। यह युवाओं के ड्रग्स की चपेट में आने की एक मुख्य वजह बनती जा रही है।
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