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एलआईजी मकानों के कब्जा धारकों को मकान करने होंगे खाली

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गमाडा के अल्टीमेटम की अवधि खत्म, लोग आए संघर्ष की राह
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फेज-11 स्थित एनआईजी मकानों को खाली करवाने का है मामला
गमाडा द्वारा कब्जा धारकों को सस्ते रेटों पर मकान अलॉट करने का दिया गया ऑफर
लोग कर रहे विरोध, उनका कहना है कि उक्त मकान ही सस्ते रेटों पर किए जाएं अलॉट
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
फेज-11 स्थित एलआईजी मकानों में दंगा पीड़ितों के नाम पर अवैध रूप से रहने वालों को गमाडा द्वारा मकान खाली करने के लिए दी गई अवधि शुक्रवार को खत्म हो गई। दूसरी तरफ कब्जाधारक गमाडा के खिलाफ संघर्ष की राह पर आ गए हैं। उक्त लोगों ने इकट्ठे होकर कुंभड़ा से बावा व्हाइट हाउस जाने वाली सड़क पर राज्य सरकार का पुतला जलाया। इस मौके पर अकाली नेता और पार्षद परमजीत सिंह काहलों व बीबी कश्मीर कौर भी मौजूद रहीं। लोगों ने साफ किया है कि गमाडा उन्हें बेघर करने की कोशिश कर रहा है। उन्हें गमाडा बूथ देने की बात कर रहा है। उन्हें बूथों की जरूरत नहीं है। उन्हें उक्त मकानों से बेघर न किया जाए। साथ ही उक्त मकान के पैसे लेकर उनसे यह सौंप दिए जाएं। दूसरी ओर गमाडा के इंफोर्समेंट विंग के ईओ महेश कुमार बंसल का कहना है कि गमाडा के पास कुल 42 में जिन लोगों ने बूथों के लिए आवेदन किया है। उनके आवेदनों की जांच की जा रही है। गमाडा को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में इन मकानों के संबंध में सोमवार को जवाब दाखिल करना है। उन्होंने कहा कि ये मकान हाईकोर्ट के आदेशों पर खाली करवाए जा रहे हैं। पंजाब सरकार ने इन लोगों को बूथों की स्कीम का लाभ लेने का भी अवसर दिया है। अगर फिर भी कोई व्यक्ति मकान खाली नहीं करता है तो हाईकोर्ट के अगले आदेशों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
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31 वर्षों से रहे हैं लोग
अकाली नेता परमजीत सिंह काहलों ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि ये दंगा पीड़ित लोग इन मकानों में करीब 31 वर्षों से परिवारों के साथ रह रहे हैं। इन लोगों के दंगा पीड़ितों वाले कार्ड किसी कारणवश बनने से रह गए। गमाडा इन्हें अवैध दंगा पीड़ित कह रहा है। उन्होंने मांग की कि गमाडा की ओर से इन लोगों को बूथों के बजाय रहने के लिए घरों का प्रबंध किया जाना चाहिए।
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