विवाहिता को मारने वाले पति, सास-ससुर व ननद को सात साल की सजा
जिला अदालत ने अठारह महीने पहले हुई महिला की मौत मामले में सुनाया फैसला
मृतका का पति मर्चेंट नेेवी में था, जबकि ससुर बिजली विभाग से है रिटायर
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
करीब 18 महीने पहले बबीता नाम की विवाहिता को जाने से मारने के मामले में जिला अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मृतका के आदर्श नगर खरड़ निवासी पति, सास-ससुर और ननद को दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई है। दोषियों में मृतका का पति नवदीप मल्होत्रा, ससुर अशोक मल्होत्रा, सास उर्मिला मल्होत्रा व विवाहिता ननद मोनिका मल्होत्रा शामिल है। अदालत ने उक्त लोगों को आईपीसी की धारा 304, 34 के तहत दोषी ठहराया है। नए साल में यह पहला मामला है, जब पूरे परिवार को जेल भेजा गया है। मृतका का पति मर्चेंट नेवी में तैनात था। जबकि ससुर बिजली बोर्ड से रिटायर है। मृतका के परिजनों ने कहा कि वह फैसले से संतुष्ट हैं, लेकिन उनकी बेटी वापस नहीं आएगी।
पुलिस को दी शिकायत में मृतका के परिजनों ने बताया था कि उनकी बेटी बबीता की शादी 27 नवंबर 2014 को हुई थी। इस दौरान उन्होंने अपनी हैसियत के मुताबिक दहेज दिया था। इसी बीच उनकी बेटी की ननद की शादी तय हो गई थी। इसके बाद बबीता के ससुराल वाले उन पर बीस लाख देने का दबाव बना रहे थे। उनका कहना था कि होने वाले दामाद और बेटी को महंगी कार देनी है। परिजनों ने बताया कि 17 जून 2016 को दोपहर के समय उनकी बेटी का फोन आया। बेटी ने उन्हें फोन पर बताया कि ससुराल वाले पैसे की मांग कर रहे हैं। ऐसे में जल्दी पैसे लेकर आएं। परिवार वालों का कहना है कि रात को आठ बजे बेटी के ससुराल जाने वाले थे। इसी बीच शाम पांच बजे उनके दामाद का फोन आया कि उनकी बेटी की मौत हो गई है। बेटी ने घर के ऊपर वाले कमरे में फंदा लगा लिया। इसके बाद बबीता का भाई सुनील और पिता राजकुमार खरड़ स्थित बेटी के घर गए। जब वह मौके पहुंचे तो ससुराल वालों ने शव नीचे उतार लिया था। इस दौरान उन्होंने देखा कि मृतका के गले से खून बह रहा था। जब उन्होंने इस बारे में दामाद से पूछा तो वह उलझ गया। उसका कहना था कि जो उन्होंने करना था, कर लिया। अब जो उन्हें करना है, वह कर लें। इसके बाद उन्हें विश्वास हो गया उनकी बेटी की हत्या की गई है। इसके बाद उन्होंने पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया था।
मृतका की तीन माह की थी बेटी
परिवार वालों ने बताया कि बेटी की जब मौत हुई थी, उस समय उसकी तीन माह की बेटी थी। उन्होंने बताया कि आरोपी छह महीने बाद जब ड्यूटी से आता था तो बेटी से मारपीट करता था। दहेज के लिए तंग करता था।
सजा सुनने से पहले सास हुई बेहोश
अदालत द्वारा जैसे ही आरोपियों को सजा सुनानी शुरू की गई तो अचानक मृतका की सास उर्मिला मल्होत्रा बेहोश होकर नीचे गिर पड़ी। उसे सिविल अस्पताल फेज-6 में भेजा गया। अस्पताल में चेकअप के बाद उसे एंबुलेंस से अदालत ले जाया गया। बाद में अदालत ने डाक्टरों की मौजूदगी में उर्मिला मल्होत्रा को सजा सुनाई।