मोहाली। सेक्टर-67 स्थित नाइपर में जारी शिक्षा महाकुंभ 2025 के दूसरे दिन शिक्षा और उद्योग के बीच साझेदारी को मजबूत बनाने पर गहन मंथन हुआ। ‘एकेडमिया–इंडस्ट्री–सोसायटी इंटरफेस’ थीम पर केंद्रित इस दिन देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। दिनभर में 70 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए और 7 कॉन्क्लेव आयोजित हुए, जिनमें तकनीक, स्थिरता, शिक्षण पद्धति और नवाचार पर चर्चाएं हुईं।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह योग और इंटरएक्टिव ब्रेकफास्ट सत्र से हुई। इसके बाद पैनल डिस्कशन में विद्या भारती उत्तर क्षेत्र की सचिव गीता आहूजा और कोषाध्यक्ष वीरेंद्र वालिया ने शिक्षा में मूल्यों और व्यवहारिक ज्ञान के संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया।
नाइपर के निदेशक प्रो. दुलाल पांडा ने कहा कि वास्तविक नवाचार तभी संभव है जब अकादमिक जगत और उद्योग एक साथ आएं। शिक्षा संस्थानों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप अपने कोर्स और शोध दिशा तय करनी चाहिए ताकि विद्यार्थी समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकें।
दोपहर के सत्रों में प्रस्तुत शोध पत्रों ने शिक्षा में तकनीकी नवाचार और टिकाऊ विकास के नए आयाम सामने रखे। इसी दौरान डीएचई इंग्लिश ओलंपियाड के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। उत्तर भारत के 10,000 से अधिक विद्यार्थियों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया था।