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मोहाली मेयर कुलवंत सिंह को मिला ऐसा तोहफा, सिद्धू हुए कैच आउट

Fri, 16 Feb 2018 10:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
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Mayor Kulwant Singh - फोटो : File Photo
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से मोहाली के मेयर कुलवंत सिंह को वीरवार बड़ी राहत मिली। अदालत ने स्थानीय निकाय विभाग द्वारा उनकी काउंसिलरिशप रद्द करने संबंधी जारी किए नोटिस को खारिज कर दिया। इसके बाद मेयर ने राहत की सांस ली। अपने समर्थक पार्षदों के साथ दोपहर साढ़े तीन बजे नगर निगम स्थित अपने दफ्तर पहुंचे। इस दौरान उन्हें बधाईयां देने वालों का तांता लग गया। वहीं, लड्डूू बांटकर इस खुशी का इजहार किया।
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इस दौरान उन्होंने कहा यह सच की जीत है। वहीं, अब इस मामले मेें स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और अन्य जो भी जिम्मेदार होंगे। उनके खिलाफ मानहानि का केस दायर करेंगे। उन्होंने बताया कि इसके लिए उनके वकील तैयारी कर चुके हैं। मीडिया से बातचीत में कुलवंत सिंह ने कहा कि कोर्ट के फैसले से वह बहुत खुश हैं। न्यायपालिका के कारण सच की जीत हुई है। उन्होंने बताया कि यह एतिहासिक फैसला है। उन्हें गलत तरीके से बदनाम कोशिश करने की कोशिश की गई। वह करीब डेढ़ महीने तक परेशानी में रहे।

उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ अब वह मानहानि का केस करेंगे। क्योंकि उन पर झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि स्थानीय विधायक ने भी उन पर गलत तरीके से आरोप लगाए। दूसरी तरफ उनके गुट के पार्षदों ने सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली। हालांकि मेयर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि शहर का विकास ऐसी जंग में प्रभावित तो जरूर हुआ था, लेकिन उन्हें सभी पार्टियों के पार्षदों ने सहयोग दिया। ऐसे में उनका भी धन्यवाद करते हैं।
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यह है मामला
चार जनवरी को नगर निगम को पंजाब सरकार ने मेयर कुलवंत सिंह को उनके ओहदे से हटाने और कुछ अफसरों को चार्जशीट करने का प्रेस नोट जारी किया था। करीब दो घंटे बाद नया प्रेस नोट जारी करके मेयर को कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला लिया गया। कारण बताओ नोटिस में कहा गया था कि पेड़ों की प्रूनिंग के लिए विदेश से खरीदी गई मशीन से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा है। मार्केट रेट से ऊंचे रेटों पर मशीन खरीदी गई है। ऐसे में क्यों न उन्हें काउंसलर के तौर पर मेंबरशिप रद्द कर दी जाए। हालांकि इससे पहले स्थानीय निकाय विभाग ने मशीन संबंधी अपने स्तर पर पूरी जांच करवाई थी। मशीन संबंधी रिकॉर्ड भी टीम ले गई थी। वहीं, नगर काउंसिल ने मशीन को रोड पर नहीं उतारा था।

हाउस मीटिंग में सिद्ध के खिलाफ पास हुआ था निंदा प्रस्ताव
पांच जनवरी को नगर निगम की मीटिंग में पार्षदों की तरफ से मंत्री के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया गया था। उस समय अकाली दल के एक सीनियर नेता और पार्षद बीबी मैनी ने विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उस समय मेयर की तरफ से यह एलान किया गया था कि वह कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ मानहानि का केस करेंगे।

बाद में मेयर कुलवंत सिंह की तरफ से 11 जनवरी को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में पटीशन दाखिल की गई थी, जिसमें सरकार की तरफ से जारी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने की मांग की गई। इस याचिका और हुई सुनवाई दौरान अदालत की तरफ से दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद गत एक फरवरी को इस मामले पर फैसला आरक्षित रख लिया था और इस संबंधित सरकार को मेयर कुलवंत सिंह के खिलाफ कोई भी कार्यवाही करने से रोक दिया गया था।

राजनीतिक कद हुआ ऊंचा
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मेयर कुलवंत सिंह का राजनीतिक कद जरूर ऊंचा हो गया है। इलाके के लोगों में उनकी छवि अच्छेे नेता के रूप में उभरेगी। लोगों का उन पर विश्वास भी बढ़ेगा।
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