मंत्री के सक्रिय होते ही मेयर जुटे किला बचाने में
अकाली दल और भाजपा पार्षदों को लेकर हिमाचल दौरे पर निकले
आपसी गुटबाजी खत्म करने और सीनियर डिप्टी मेयर के पद को हासिल करने पर बन रही रणनीति
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। कैबिनेट मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू के सक्रिय होने के बाद मेयर कुलवंत सिंह भी अपने दल के पार्षदों को एकजुट करने में जुट गए हैं। वे अकाली और भाजपा पार्षदों को लेकर हिमाचल दौरे पर निकल गए हैं। वहां मेयर नगर निगम की भविष्य की रणनीति बना रहे हैं। सूत्रों से पता चला है कि सीनियर डिप्टी मेयर पद के सपने दिखाकर पार्षदों को एकजुट करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि कुछ पार्षद इस दौरे में शामिल नहीं हुए हैं। भले ही इसे निजी कारण बताया जा रहा है, लेकिन इसको लेकर भी राजनीति गर्माई हुई है।
पशुपालन मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू कुछ समय से शहर की राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने हाल में अधिकारियों के साथ मीटिंग की थी, जिसमें इलाके के लोग भी मौजूद थे। मीटिंग में लोगों की समस्याओं को मौके पर हल करने का प्रयास किया गया। इसके अलावा नगर निगम के कामों में भी विधायक का दखल बढ़ता जा रहा है। हाल में ही नगर निगम के कमिश्नर भी बदल गए हैं। ऐसे में शहर में विकास का पहिया कैसे घूमेगा, इसको लेकर राजनीति गर्माई हुई।
इस बीच मेयर अकाली दल और भाजपा के पार्षदों, महिला पार्षदों के पतियों व कुछ पूर्व पार्षदों को लेकर हिमाचल प्रदेश चले गए हैं। जहां पर सभी को एकजुट करने की कोशिश है। कुछ अकाली नेता दबी जुबान में कहते हैं कि मेयर तो नाम के अकाली हैं, क्योंकि पार्टी की अधिकतर मीटिंग मेें वह शिरकत नहीं करते।
जिक्रयोग है कि मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू व मेयर कुलवंत सिंह में मतभेद कई महीने से चल रहे हैं। प्रूनिंग मशीन के मामले में दोनों की राय बिल्कुल अलग है। अभी कुछ दिन पहले विधायक ने अफसरों के साथ मीटिंग की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि चंडीगढ़ की तर्ज पर 40 लाख की लागत से दो नई मशीनें खरीदी जाएंगी। जबकि मेयर उक्त मशीनों को जुगाड़ कहते हैं। उनका कहना कि उनकी कोशिश यही है कि विदेश से मंगवाई मशीन को ही प्रयोग में लाया जाएगा।
तीन पार्षदों को न्योता नहीं दिया गया
पता चला है कि अकाली दल व बीजेपी के पार्षदों को मेयर अपने साथ हिमाचल ले गए हैं। अकाली दल के उन तीन पार्षदों को टूर का हिस्सा नहीं बनाया गया जो हाउस में मेयर को घेरने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा अकाली दल व बीजेपी कुछ पार्षद निजी कारणों के चलते टूर का हिस्सा नहीं बने हैं।