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चार लोगों को मौत के घाट उतारा

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परिवार के चार लोगों को मारने वाला दोषी करार
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14 साल पहले खुशविंदर सिंह ने की थी एक साथ हत्याएं
छह लोगों की हत्या में दोषी को हो चुकी है फांसी की सजा
अदालत द्वारा दोषी को 28 अगस्त को सुनाई जाएगी सजा
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। 14 साल पहले एक ही परिवार के चार लोगों को बेरहमी से मौत के घाट उतारने वाले फतेहगढ़ साहिब के रहने वाले कातिल को सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को दोषी करार दे दिया। अदालत उसे 28 अगस्त को सजा सुनाएगी। दोषी को पहले भी एक ही परिवार के छह लोगों को मारने के मामले में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। यह केस सीबीआई जज एनएस गिल की अदालत में चल रहा था। दोषी खुशविंदर सिंह उर्फ खुशो जिला फतेहगढ़ साहिब के गांव सुहावी का रहने वाला है। अदालत ने उसे धारा 302 (हत्या), 364 (किडनैपिंग) और 201 (सबूतों को मिटाने की धारा) के तहत दोषी ठहराया गया है।

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ऐसे मारा था आरोपियों को
खुशविंदर सिंह काफी शातिर है। उसने जिन लोगों को मौत के घाट उतार था, वह उस परिवार का जानकार था। परिवार नौगांवा फतेहगढ़ साहिब का रहने वाला था। उसने परिवार के मेंबरों को अपनी बातों में फंसा लिया था। साथ ही कहा कि वह नहर के किनारे बैठकर सुबह अंधेरे में ख्वाजा की पूजा करेंगे। इस दौरान अपनी सारी दौलत ले आना। पूजा से पैसे में बरकत आएगी। परिवार वाले 12 लाख रुपये ले गए। जैसे ही परिवार वाले वहां पर पहुंचे। आरोपी ने कुलवंत सिंह 42, पत्नी हरजीत कौर 40, रमनदीप कौर 17 व बेटे 14 को लाइन में बैठा दिया। साथ ही कहा कि वे पूजा करेंगे। इस दौरान सभी लाइन में बैठकर आंखें बंद कर पूजा करने लगे। इसी बीच आरोपी ने एक-एक करके सभी को नहर में फेंक दिया। ये चारों हत्याएं 3 जून, 2004 में हुई थीं। इसके बाद मृतक के साले कुलतार सिंह के बयानों पर बस्सी पठाना में 5 जून को केस दर्ज हुआ था।
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मां-बेटे का नहीं मिला शव
घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। शवों की तलाश शुरू हुई थी। 7 जून को रमनदीप का शव नहर से निकाला गया। फिर 9 जून को कुलवंत सिंह का शव नहर से निकाला गया। हरजीत कौर व उसके बेटे अरविंदर सिंह का शव आज तक बरामद नहीं हुआ।

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2012 में पकड़ा गया तो कबूली वारदात
जब 2012 में खुशविंदर पकड़ा गया तो उसने सीबीआई के सामने चारों लोगों को मारने की बात कबूल ली थी। उसने सीबीआई को बताया था कि मृतक कुलवंत सिंह के परिवार ने 12 लाख की जमीन बेची थी। उसे इस बात का पता था। पैसे के लालच में उसने उनको मारने की सारी गेम रची थी।

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भाई से होती रही पूछताछ आरोपी खुलेआम घूमता रहा
दोषी का बड़ा भाई कुलविंदर मृतका हरजीत कौर के भाई कुलतार सिंह के पास काम करता था। वह मुंशी का काम देखता था। ऐसे में फतेहगढ़ पुलिस आरोपी तक नहीं पहुंच पाई थी। जिसके बाद 2005 में फतेहगढ़ साहिब की पुलिस ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी थी। इसके बाद कुलतार सिंह के भाई की प्रार्थना पर यह केस स्टेट क्राइम ब्रांच को शिफ्ट हो गया था। 3 अगस्त 2006 में स्टेट क्राइम बांच ने भी क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी थी।

हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई को दिया था केस
इसके बाद कुलतार सिंह ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की 2007 में शरण ली थी। 16 मार्च, 2007 में अदालत ने केस सीबीआई को दे दिया था। सीबीआई भी आरोपी तक नहीं पहुंच पाई थी। इसके बाद 2009 में सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट फाइल कर दी थी।
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ऐसे खुली थी आरोपी की पोल
जून 2012 में खुशविंदर एक बार फिर सुर्खियों में आया था। इस दौरान उसने अपनी पत्नी की मामी के परिवार को निशाना बनाया था। छह लोगों की नहर में फेंककर हत्या कर दी थी। इसमें गुरमैल सिंह 70 रिटायर्ड पंजाब पुलिस कांस्टेबल, पत्नी परमजीत कौर 60, बेटा गुरिंदर सिंह 30, निवासी मुकंदपुर लुधियाना, रूपिंदर सिंह 35, बेटा जसकीरत सिंह 7 व प्रभसिमरन कौर 6 साल शामिल हैं। गुरमैल सिंह की पुत्री जैसमीन कौर 32 नहर में फंस गई थी। इससे वह बच गई थी। जैसमीन की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। उनसे 36 लाख रुपये की बरामद हो गई। इसके बाद उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी। इस दौरान आरोपी ने उक्त वारदात को कबूल लिया था।
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