नहरी विभाग में करोड़ों के घोटाले में चार को सात साल की सजा
जिला अदालत ने सुनाया अहम फैसला, एक आरोपी भगोड़ा
19 साल पुराना है मामला, विजिलेंस ने दर्ज किया था केस
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
जिला अदालत ने फर्जी बिल बनाकर सरकारी खजाने को नौ करोड़ का नुकसान पहुंचाने के 19 वर्ष पुराने मामले में फैसला सुनाया है। यह मामला नहरी विभाग में सामने आया था। मामले में चार लोगों को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई है। जबकि दो आरोपियों को बरी कर दिया गया है। यह केस विजिलेंस की तरफ से केस दर्ज किया गया था।
जानकारी के मुताबिक, अदालत ने मामले के दो आरोपियों बहादुर सिंह व जसविंद्र सिंह को बरी कर दिया। जबकि बाकी चार आरोपियों कुलदीप सिंह, हरिंद्र सिंह मोहाली, बंत सिंह भवानीगढ़ और देवराज को अदालत ने 7-7 वर्ष की कैद की सजा सुना दी। इसके अलावा हरिंद्र सिंह पर 6 लाख 40 हजार जबकि दो अन्य आरोपियों पर 5.40-5.40 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने सभी आरोपियों को सजा सुनाने के बाद पटियाला जेल भेज दिया। वहीं, केस का एक आरोपी सुदेश कुमार अदालत से भगोड़ा चल रहा है।
ऐसे पहुंचाया था नुकसान
जानकारी के मुताबिक, विजिलेंस ब्यूरो की ओर से मार्च 1998 में जसविंद्र सिंह निवासी मुंडी खरड़, बहादुर सिंह, कुलदीप सिंह, हरिंद्र सिंह मोहाली, बंत सिंह भवानीगढ़, देवराज और सुदेश कुमार के खिलाफ आईपीसी की धारा 406, 420, 465, 467, 468, 471, 478 व प्रीवेंशन आफ करप्शन एक्ट की धाराओं 13(2)88 के तहत केस दर्ज किया गया था। बहादुर सिंह व हरिंद्र सिंह खजाना आफिस में कर्मचारी के तौर पर तैनात थे। कुलदीप सिंह फाइनांसर था। जबकि जसविंद्र सिंह फैक्ट्री मालिक था। सुदेश कुमार उसकी फैक्ट्री में कर्मचारी था और बाकी सभी आरोपी प्राईवेट व्यक्ति थे। इन सभी ने आपस में मिलीभगत करके नहरी विभाग के जाली बिल तैयार किए और सरकारी खजाने को एक करोड़ दस लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया।