खरड़। रेलवे विभाग द्वारा चंडीगढ़-लुधियाना व मोरिंडा-कुराली रेलवे लाइनों पर खरड़ सब-डिवीजन में छह जगह बने अंडर काजवे बरसात के दिनों में यातायात के लिए बड़ी मुसीबत बन जाते हैं। थोड़ी सी बारिश होते ही काजवे में पानी भर जाता है, जिससे वाहन चालकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रेलवे द्वारा खरड़-गडांगा सड़क, खरड़-बस्सी पठाना सड़क, मगर-तोलेमाजरा सड़क घडुआं-माछीपुर सड़क, कुराली-बडाली सड़क तथा डेरा गुसाई आणा पर यातायात के लिए अंडर काजवे बनाए हुए हैं। इन अंडर काजवे में बरसात के दिनों में पानी भर जाता है, जिनकी निकासी का कोई स्थायी इंतजाम नहीं है। शहरी इलाके में पड़ते अंडर काजवे से नगर काउंसिल द्वारा तथा ग्रामीण क्षेत्र में बने अंडर काजवे से पंचायत विभाग द्वारा अस्थायी तौर पर टुल्लू पंप लगा कर पानी निकाला जाता है। परंतु जब बरसात से पहले या बाद में बारिश का पानी इनमें जमा हो जाता है, तो उसका निकास करने के लिए कोई प्रबंध नहीं होता। दोपहिया वाहन चालकों को पानी में से होकर गुजरना पड़ता है, जबकि कारों, बसों समेत अन्य भारी वाहन यहां से नहीं गुजर पाते। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को खरड़, मोहाली, चंडीगढ़ तथा कुराली समेत अन्य शहरों और स्कूलों-कालेजों व यूनिवर्सिटी में शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों, सरकारी कर्मचारियों, रोजाना अपने काम धंधे पर जाने वाले लोगों को अन्य रास्तों से होकर कई किलोमीटर सफर तय करके आना-जाना पड़ता है। रात के समय अप्रिय घटना होने का भी डर बना रहता है।
लोग बोले- अंडर काजवे बंद कर ओवरब्रिज बनाए जाएं
समाज सेवक अशोक बजहेड़ी, भूपिंदर सिंह, अमनदीप सिंह मान, हरमिंदर सिंह तथा जसविंदर सिंह समेत अन्य लोगों ने कहा कि जब रेलवे लाइनों पर फाटक बने हुए थे तो यातायात के अच्छे प्रबंध थे। उन्होंने मांग की कि रेलवे विभाग इन अंडर काजवे को बंद करके ओवरब्रिज बनाए, ताकि वाहन चालकों के लिए कोई समस्या न हो। उन्होंने कहा कि रंधावा रोड पर बने अंडर काजवे से बडाला नया शहर को जो सड़क मुड़ती है, उससे भी आने जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि यहां पर एक तीखा मोड़ है।
समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों से करेंगे बात
पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री व सीनियर कांग्रेस नेता जगमोहन सिंह कंग ने कहा कि इस समस्या का समाधान करने के लिए जल्द ही रेलवे विभाग के अधिकारियों के साथ बात की जाएगी, ताकि इन अंडर काजवे में बरसात का पानी जमा न होने संबंधी स्थायी समाधान हो सके।