मोहाली। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) ने एयरोसिटी एक्सटेंशन को बसाने की तैयारी शुरू कर दी है। यह सिटी करीब 762 एकड़ में बसाई जानी है, लेकिन कई गांवों के किसानों ने उक्त प्रोजेक्ट के लिए अपनी जमीन देने से हाथ पीछे खींच लिए हैं। उनकी दलील है कि जब तक उनकी पहले एक्वायर की गई जमीनों की लैंड पूलिंग के तहत दिए जाने वाले कामर्शियल प्लाटों की अलाटमेंट का काम पूरा नहीं होगा, तब तक वह अपने प्रोजेक्ट के लिए जमीन नहीं देंगे। इसमें गांव बाकरपुर, छत व नारायणगढ़ झुग्गियां का एरिया शामिल है।
लैंड पूलिंग स्कीम के तहत एक्वायर की जाने वाली जमीन संबंधी सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण करने के लिए अधिकारियों की टीम वीरवार को गांव बाकरपुर में पहुंची। टीम ने जमीन मालिकों को फार्म दिए, जिसमें जमीन एक्वायर होने के कारण उन पर होने वाले सामाजिक आर्थिक प्रभावों के बारे में जानकारी भरी जानी है। इस दौरान किसान संघर्ष कमेटी ने सरकार को अपनी जमीन नहीं देने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार ने साल 2010-11 में एक्वायर की गई उनकी जमीनों के बदले उन्हें लैंड पूलिंग आप्शन दिया था। स्कीम के तहत उन्हें रिहायशी प्लाट दे दिए गए हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कामर्शियल प्लाट नहीं दिए गए। किसान अभी भी अपना हक लेने के लिए गमाडा के चक्कर काट रहे हैं।
किसान मक्खन सिंह, जतिंदर सिंह, भूपिंदर सिंह, तलविंदर सिंह, अजैब सिंह बाकरपुर व अन्यों ने बताया कि मोहाली के तहसीलदार सुखविंदर कौर की अगुवाई में अधिकारियों की टीम गांव में आई थी। उन्हें एयरोसिटी के अगले चरण के लिए जमीन एक्वायर करने के बारे में बताया गया था। उन्होंने अधिकारियों को कहा है कि जब तक उनकी पिछली जमीन की लैंड पूलिंग के तहत मिलने वाले प्लाट नहीं दिए जाएंगे, वेे नए सिरे से अपनी जमीन नहीं देंगे।
यह कहती हैं तहसीलदार
मीडिया से बातचीत में तहसीलदार सुखपिंदर कौर ने बताया कि अधिकारियों की टीम गांव में आर्थिक सामाजिक सर्वेक्षण के लिए गई थी। जमीन एक्वायर होने के कारण प्रभावित लोगों को नए सिरे से बसाने की प्रक्रिया की जा रही है। उन्होंने जमीन मालिकों को कहा है कि वह सरकार की तरफ से दिए जाने वाले फार्मों में अधिक से अधिक जानकारी भर कर दें, ताकि इस संबंधी बनने वाली पुनर्वास नीति में किसानों की सारी जरूरतों को पूरा किया जा सके।