जून की भीषण गर्मी के प्रकोप से छतबीड़ जू में जानवर भी बेहाल हैं। जू प्रशासन इन्हें गर्मी से बचाने के लिए ग्लूकोन-डी पिला रहा है। वहीं वन्य जीवों के लिए उद्यान में कपड़े के पर्दे, पानी की बौछारों वाले फव्वारे और कूलर लगवाए गए हैं। भालू के बाड़े के आसपास भी पानी की बौछारों वाले फव्वारे और कूलर लगवाए गए हैं। बता दें कि कुछ जानवर और पक्षी भीषण गर्मी को सहन नहीं कर पाते जिसके चलते वह बीमार हो जाते हैं, जबकि कुछ छोटे पक्षियों की तो मौत तक हो जाती है।
छतबीड़ जू के डायरेक्टर ने बताया कि अभी पारा 40 डिग्री के पार बना हुआ है, लेकिन 48 डिग्री तक तापमान जाने के अनुमान जू में तैयारी की गई है। जू में मौजूद जानवरों में सबसे ज्यादा गर्मी हिमालयन भालू को लगती है और उसके बाद पक्षी इस श्रेणी में आते हैं, जबकि शेर और चीता थोड़े स्ट्रांग होते हैं, इसलिए थोड़ी बहुत गर्मी बर्दाश्त कर सकते हैं।
तालाबों में जहां पानी पूरा किया गया है तो वहीं शेरों व चीतों के लिए कूलर लगाए गए हैं। वहीं, पक्षियों व भालू के बाडे़ में ऊंचाई से पानी फेंकने वाले पंखे व फव्वारे लगाए गए हैं, जोकि पारे में एक से दो डिग्री का फर्क डालने में कारगर साबित होते हैं। उन्होंने बताया कि भालू के लिए बर्फ की सिल्ली का भी प्रबंध किया गया है।
खाने में भी बदलाव
बढ़ती गर्मी के चलते जानवरों के खाने में भी बदलाव किया गया है। भालू को जू प्रबंधन की ओर से खाने में फ्रूट क्रीम दी जा रही है तो बाकी जानवरों को ग्लूकोज और ग्लूकोन-डी पिलाया जा रहा है। जानवरों की डाइट में ठंडी चीजें, जैसे फ्रूट क्रीम, ठंडी खीर के अलावा कई अन्य चीजें शामिल की गई हैं।