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पारा 40 डिग्री के पार, जवाब देने लगे ट्यूबवेल

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जीरकपुर। गर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। पारा लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है। भीषण गर्मी में नगर काउंसिल के ट्यूबवेल भी हांफने लगे हैं, जिसके चलते शहर के विभिन्न हिस्सों में पानी की किल्लत होनी शुरू हो गई है। कई इलाकों में लोगों को तीन दिन से पानी नहीं मिला जिसके चलते लोगों को धरना प्रदर्शन तक करना पड़ रहा है। लोगों को पानी की कमी के चलते परेशान न होना पड़े, इसके लिए काउंसिल ने कोई वैकल्पिक प्रबंध नहीं किया है। नगर काउंसिल के ट्यूबवेल आपस में इंटरकनेक्ट हैं, ऐसे में अगर कोई ट्यूबवेल खराब हो जाता है तो आसपास के इलाकों में पानी पूरे प्रेशर के साथ नहीं पहुंच पाता। यही नहीं हर साल भूमिगत पानी का लेवल करीब तीन फुट नीचे जा रहा है, जिसकी वजह से भी ट्यूबवेलों की मोटरें पूरी क्षमता के साथ पानी नहीं निकाल पा रही हैं। लिहाजा, गर्मी में मोटरें जवाब देने लगी हैं, वहीं बिजली की लो और हाई वोल्टेज के कारण भी मोटर जलने से ट्यूबवेलों के संचालन में दिक्कत आ रही है।
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बलटाना के हेम विहार के लोगों ने वीरवार को पार्षद और नगर काउंसिल के अधिकारियों के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया था। लोगों का कहना है कि यहां पानी की समस्या है और पार्षद व अधिकारी उनकी सुनवाई नहीं कर रहे, जिसके चलते वह निजी टैंकर मंगवाकर पानी की आपूर्ति लेने को मजबूर हैं। कालोनी की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान तिलक राज शर्मा, चेयरमैन मिल्खी राम ने बताया कि कालोनी में लगे ट्यूबवेल के खराब होने से फेज-1 और 2 में पिछले एक सप्ताह से पीने के पानी की समस्या पेश आ रही है। इस बारे में वार्ड के पार्षद को भी अवगत कराया, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। प्रदर्शन के बाद शुक्रवार को नगर काउंसिल के ठेकेदार की नींद टूटी और उसने ट्यूबवेल की मोटर को कुछ नीचे किया जिससे आज हेम विहार क्षेत्र के लोगों के घरों में गुजारे लायक पानी तो पहुंच गया, लेकिन लोग इस टेंपरेरी प्रबंध को नाकाफी कह रहे हैं। लोगों का कहना है कि काउंसिल को जल्द कजोली वाटर वर्क्स से पानी लाने पर विचार करना चाहिए।

काउंसिल पानी बचाने के लिए चलाएगी मुहिम
जीरकपुर नगर काउंसिल के प्रधान कुलविंदर सोही ने बताया कि पानी का स्तर गिरना चिंता की बात है। यहां पानी को बचाने के लिए एक मुहिम शुरू की जाएगी। एमसी मीटिंग में तय किया जाएगा कि जितने भी मकान बनेंगे उनमें हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूर लगे हों, ताकि जो भी पानी बरसात का या नलों से निकलकर सड़कों पर बहता है, वह फिर से जमीन में जाए। सोही ने कहा कि सरकार को इसमें और काम करने की जरूरत है।
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