- दिल्ली के सेंट्रल जू अथॉरिटी से मिली अनुमति
- गुजरात के सीएम के पास अप्रूवल के लिए पहुंची फाइल
- अब बस सीएम के सिग्नेचर का इंतजार
- नए साल में शेर और शेरनी का एक जोड़ा राजकोट जू से लाया जाएगा
दीपक शाही
जीरकपुर। नए सत्र से छतबीड़ जू के लायन सफारी में आने वाले पर्यटक अपने आप को ठगा हुआ महसूस नहीं करेंगे। क्योंकि यहां गुजरात के राजकोट जू से शेर और शेरनी का एक जोड़ा छतबीड़ जू प्रशासन मंगाने की तैयारी में है। इसके लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी दिल्ली से अनुमति मिल गई है। अब गुजरात के सीएम के पास फाइल अप्रूवल के लिए गई है। वहां से अप्रूवल मिलते ही छतबीड़ जू में शेर और शेरनी का एक जोड़ा लाया जाएगा। अभी फिलहाल लायन सफारी में एक मेल शेर (युवराज) और तीन फिमेल (हीर, हेली व शिल्पा) शेरनी हैं। इन्हें दिखाने के लिए पर्यटकों से जू प्रशासन की ओर से 75 रुपये चार्ज लिया जाता है। पर्यटकों की माने तो अक्सर लायन सफारी की सैर के दौरान शेर शेरनी के जोड़ों को वह देख नहीं पाते, कई बार दिखते हैं तो पर्यटकों को मजा नहीं आता, क्योंकि वह सुस्त किनारे कहीं बैठे रहते हैं। इन जानवरों को देखकर ऐसा लगता है कि उन्हें आराम नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में जू में आने वाले पर्यटकों के बीच लायन सफारी घूमने से पहले जो रोमांच होता है, घूमने के बाद वह खत्म हो जाता है और वह घर निराश लौटते हैं। बता दें कि चंडीगढ़ और शिमला की सैर के लिए आने वाले उत्तर भारत के पर्यटक सुखना लेक, रॉक गार्डन व रोज गार्डन के बाद छतबीड़ जू घूमना सबसे अधिक पसंद करते हैं। इसी के मद्देनजर जू प्रशासन की ओर से देश अन्य चिड़ियाघरों में भी संपर्क किया जा रहा है।
रोचक बनाने के लिए 150 हिरणों को शामिल किया
लायन सफारी में बोर हो रहे पर्यटकों को रोमांचित करने के लिए चार प्रजातियों के करीब 150 हिरण शामिल किया गया है। इस पूरे सफारी की सैर 30-40 मिनट कराया जाता है। पहले पर्यटकों से 50 रुपये चार्ज किया जाता था, डियर सफारी मर्ज होने के बाद पर्यटकों को 75 रुपये देना पड़ता है।
कभी डेढ़ दर्जन शेरों से गुलजार था छतबीड़ जू
किसी समय छतबीड़ जू डेढ़ दर्जन शेरों की दहाड़ से गुलजार था। ट्राइसिटी हीं नहीं पूरे उत्तर भारत से पर्यटक इनकी दहाड़ सुनने के लिए आते थे। अचानक सन 1999 में शेरों के बीमारी और नेचुरल डेथ के कारण शेरों की संख्या कम होने लगी। यहां ब्रीडिंग प्रोग्राम पर भी सवाल उठा। असल विवाद 80 के दशक में एशियाटिक नस्ल की अफ्रीकी नस्ल के साथ क्रॉस ब्रीडिंग पर भी खड़ा हुआ था। हालांकि 90 के दशक में शेरों की संख्या बढ़ी थी लेकिन, उसके बाद बीमारियों से कई शेरों की मौत हो गई थी। 1999 से 2005 के बीच भी शेरों के मरने की घटनाएं हुईं।
जनवरी में खुलेगा जू का नया एंट्री गेट
छतबीड़ जू में तैयार नया गेट जनवरी 2019 मेचं पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। पुराने गेट से कुछ दूरी बने इस गेट में एंट्री होगी, तो दूसरी ओर से एग्जिट रखा गया है। गेट पर सुरक्षा उपकरण भी होंगे। इसके अलावा टिकट बुकिंग काउंटर भी बनाए गए हैं, जिसकी शुरुआत मार्च 2019 तक होगी। जहां पर्यटकों के बैठने के लिए भी अच्छी व्यवस्था की गई है।
क्या कहते हैं जू के फील्ड डायरेक्टर
छतबीड़ जू के फील्ड डायरेक्टर एम सुधाकर ने बताया कि गुजरात में फॉरेस्ट विंग ने अप्रूवल दे दिया है। फाइल वहां के सीएम के पास गई है, वहां के राज्य सरकार से अप्रूवल मिलते ही जानवरों को देखने जाएंगे। उसके बाद छतबीड़ जू के लायन सफारी के लिए एक शेर और शेरनी का जोड़ा लाया जाएगा। सारी प्रक्रिया प्रॉसेस में है। नए सत्र 2019 में पर्यटकों के लिए यह एक जू प्रशासन की ओर से सौगात होगा।