फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बस स्टैंड बंद करवाने गई गमाडा की टीम लौटी खाली हाथ

विज्ञापन
विज्ञापन
बस स्टैंड बंद कराने गई गमाडा की टीम लौटी खाली हाथ
विज्ञापन

बस ऑपरेटरों के विरोध के कारण गमाडा ने लिया यू-टर्न
गमाडा ने बस स्टैंड के एंट्री प्वाइंट पर जेसीबी से खोद दिया था गड्ढा
बाद में गड्ढे बंद कर लौटी टीम, दूर जाने वाले बस यात्री हुए परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
बसों के स्टाफ के विरोध के बाद फेज-8 स्थित पुराने बस स्टैंड को बंद कराने गई गमाडा की टीम को शुक्रवार शाम खाली हाथ लौटना पड़ा। इस दौरान एंट्री प्वाइंट पर अपनी बसें लगा दीं। इस दौरान कुछ लोगों ने विधायक को फोन कर मामले की जानकारी दी। अंत में गमाडा की टीम जेसीबी मशीन लेकर वापस लौट गई। वहीं, विभिन्न बसों के इंचार्जों का कहना था कि इस मामले में 16 दिसंबर को सरकार व गमाडा से उनकी मीटिंग होने वाली है। बैठक के दौरान जो नतीजा आएगा, उसके अनुसार कार्रवाई करेंगे।
जानकारी के मुताबिक, गमाडा की टीम शाम करीब साढ़े छह बजे अचानक फेज-आठ स्थित पुराने बस स्टैंड पर पहुंच गई। साथ ही बस स्टैंड के एंट्री प्वाइंट पर गड्ढे खोदने शुरू कर दिए। इस दौरान गमाडा की टीम अपनी सिक्योरिटी भी साथ लेकर पहुंची थी। इसके अलावा पुलिस मुलाजिम भी थे। जब बस वालों ने गमाडा की कार्रवाई को देखा तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत अपने मालिकों व जानकारों को फोन कर इस बारे में सूचित किया। साथ ही गमाडा की कार्रवाई का विरोध कर दिया।
विज्ञापन

बस ऑपरेटरों का कहना था कि विधायक ने कहा है कि पुुराने स्टैंड से ही बसें चलेंगी। गमाडा बस स्टैंड को बंद नहीं कर सकता था। गमाडा ने जेसीबी से एंट्री प्वाइंट पर गड्ढे खोद दिए। इसके बाद बस आपरेटरों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। अपनी बसें आगे खड़ी कर गमाडा की कार्रवाई को रोक दिया। कुछ लोगों ने तुरंत विधायक को फोन कर सूचित किया। इसके बाद विधायक ने फोन पर अधिकारियों से संपर्क किया। उसके बाद गमाडा की टीम ने कार्रवाई रोक दी और वापस लौट गई। हालांकि जाते समय गमाडा जेसीबी द्वारा खोदे गए गड्ढे भर दिए गए।
जिक्रयोग है कि मोहाली का नया बस स्टैंड पूर्व भाजपा-अकाली सरकार के कार्यकाल में फेज-छह में बनाया गया था। यह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। शहर से बाहर होने के कारण बस आपरेटर इसके पक्ष में नहीं थे। वहीं, कांग्रेसी विधायक बलबीर सिंह सिद्धू ने भी लोगों को भरोसा दिया था कि उनकी पार्टी की सरकार आने पर पुराना बस स्टैंड पहले की तरह ही चलता रहेगा। जैसे ही सूबे में कांग्रेस की सरकार बनी, दोबारा पुराने बस स्टैंड से बसें चलनीं शुरू हो गईं। जबकि नए बस स्टैंड पर कम ही बसें जाती हैं। हालत यह है कि वहां पर ताले लगाने की नौबत आ गई है।
विज्ञापन


सवारियां भी हुई परेशान
जिस समय गमाडा ने कार्रवाई की, वह समय अधिकतर दूर जाने वाली बसों के जाने का होता है। गमाडा की कार्रवाई के कारण दूर जाने वाले यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। लोगों का कहना था कि सरकार को चंडीगढ़ की तरह दोनों बस स्टैंड रखने चाहिए। ताकि किसी भी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें