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मोहाली में इस साल भी रहेगा पानी का संकट

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इस साल भी गर्मियों में शहर में रहेगा पानी का संकट
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- पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा, अभी तक नहीं लग पाया ट्रीटमेंट प्लांट
- पाीन के लिए संघर्ष करने वाले पार्षद ने दोबारा कोर्ट जाने की तैयारी की
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। इस साल भी गर्मी के मौसम में वीआईपी शहर के लोगों को पीने के पानी के संकट का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि कजौली वाटर वर्क्स से शहर को पानी सप्लाई करने वाली पाइपलाइन बिछा दी गई है लेकिन जंडपुर में लगने वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम अभी भी ठंडे बस्ते में पड़ा है। जिस जगह पर यह प्लांट लगना है, वहां पर अभी झांड़ियां और जंगली घास है। दूसरी तरफ इसी पाइपलाइन से चंडीगढ़ जाने वाले पानी को सुधारने के लिए चंडीगढ़ नगर निगम की तरफ से इसी जगह के साथ लगती जमीन पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा चुका है। आने वाले दिनों में चंडीगढ़ निवासियों को पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
पानी की समस्या के हल के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में पंजाब सरकार के खिलाफ केस दायर करके कजौली से सीधी पाइपलाइन के जरिये पानी सप्लाई करने संबंधी प्रोजैक्ट तैयार करवाने वाले पार्षद कुलजीत बेदी ने अब सरकार के खिलाफ मानहानि का केस दायर करने की तैयारी की है। बेदी ने बताया कि इस संबंधी उन्होंने कई साल पहले हाईकोर्ट में गमाडा, जनसेहत विभाग और पंजाब सरकार के खिलाफ केस दायर किया था। उनकी तरफ से दायर किए केस की सुनवाई के बाद छह साल पहले (जुलाई 2013 में) गमाडा ने अदालत में बाकायदा हलफनामा देकर शहर में पेयजल की कमी को पूरा करने के लिए दो सालों में कजौली वाटर वर्क्स से 40 एमजीडी पानी की सप्लाई लाइन डालने की बात कही थी, लेकिन अब पानी को सुधारने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट न बनाने के कारण शहर वासियों को यह पानी मिलने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। शहर को 40 एमजीडी पानी देने की बात कही गई थी लेकिन इस पाइपलाइन से मोहाली निवासियों को सिर्फ पांच एमजीडी पानी ही दिया जाना है जबकि बाकी का 35 एमजीडी पानी चंडीगढ़ को दे दिया गया है।
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350 करोड़ खर्च करने के बाद भी नतीजा जीरो
पार्षद बेदी ने बताया कि वह शहर निवासियों को पानी की सप्लाई मुहैया करवाने के लिए छह सालों से गमाडा के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन गमाडा अधिकारी उनकी बात एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देते हैं जबकि इस काम पर गमाडा की तरफ से लगभग 350 करोड़ रुपये खर्च भी किए जा चुके हैं, उसके बावजूद नतीजा जीरो है।
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