- पंजाब को नशा मुक्त बनाने की एसटीएफ ने की स्पेशल तैयारी
- 22 सूत्री प्रोग्राम किया तैयार, हर महीने एसएसपी को देना जवाब
- जिस भी स्तर पर सामने आई खामियां, वहां पर होगी उच्च स्तरीय कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने पंजाब को नशा मुक्त बनाने और उड़ता पंजाब की छवि धोने के लिए 22 सूत्रीय प्रोग्राम बनाया है। इसके तहत जहां नशा तस्करों को पकड़ने के साथ-साथ उनकी प्रॉपर्टी अटैच करने से लकर नशा छोड़ने वालों का इलाज करवाना शामिल है। वहीं, इस स्पेशल प्रोग्राम को हर जिले में चलाया जाएगा और प्रत्येक जिलों के एसएसपी से इस संबंध में रिपोर्ट ली जाएगी। जहां भी उचित तरीके से काम नहीं होगा, वहां पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी। यह दावा मंगलवार को एसटीएफ के प्रमुख मोहम्मद मुस्तफा ने किया।
उन्होंने बताया कि एक जनवरी 2017 से लेकर 31 दिसंबर 2018 तक नशा तस्करों द्वारा अवैध तरीके से बनाई संपत्ति के 58 केस रजिस्ट्रर हुए थे। इनमें से बीस करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली गई थी। वहीं, 49 मामलों पर जल्द ही कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा जिस भी आरोपी पर अब एनडीपीएस का केस दर्ज होगा, अगर तीन दिन में आरोपी काबू नहीं होते है तो एसटीएफ उसकी संपत्ति अटैच करने के लिए एप्लीकेशन लगाई जाएगी। इससे अपराधी आसानी से पकड़े जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा स्पेशल टास्क फोर्स के गठन के बाद पंजाब सरकार ने नशों के खिलाफ अपनी व्यापक कार्यवाही के तहत एनफोर्समेंट-डीएडिक्शन-प्रीवेन्शन (ईडीपी) रणनीति को अपनाया है। एक बहुस्तरीय निगरानी और कार्यान्वयन तंत्र लागू किया गया है। इसमें मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट उप-समिति, मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एपेक्स समिति एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) की अध्यक्षता में विशेष ड्रग्स समूह का गठन किया गया है। पूरे कार्यक्रम की निगरानी मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव द्वारा सचिव रैंक के नोडल अधिकारी के माध्यम से की जा रही है। जिला मिशन टीम और सब-डिवीजन मिशन टीमें जमीनी स्तर पर कार्यक्रम को लागू कर रही हैं। इस अवसर पर अन्य विशेष प्रमुख सचिव-एडीजीपी मुख्यमंत्री हरप्रीत सिंह सिद्धू, आईजी स्पेशल टास्क फोर्स बी चंद्र शेखर, आईजी प्रमोद बान, आईजी आर के जायसवाल, आईजी बलकार सिंह सिद्धू भी उपस्थित थे।
यह प्वाइंट अपनाए गए हैं...
1. एसटीएफ का युक्तिकरण और पुनर्गठन।
2. सभी 27 आयुक्तों/जिलों में एंटी-नारकोटिक्स सेल का गठन।
3. प्रोफार्मा के माध्यम से एनफोर्समेंट की मासिक निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
4. घोषित अपराधियों की गिरफ्तारी और उनकी संपत्ति की कुर्की; यू / एस 174-ए आईपीसी के तहत।
5. भगौड़े अपराधी / जमानत के दौरान फरार/ पैरोल जम्पर्स की गिरफ्तारी; यू / एस 229-ए आईपीसी के तहत।
6. उन सभी मामलों में चार्जशीट दाखिल करना जहां एफएसएल की रिपोर्ट प्राप्त हुई है।
7. डिफॉल्ट जमानत मामलों की समीक्षा तथा जमानत रद्द करने के लिए और आवेदन दाखिल करना।
8. जांच के लिए समय अवधि बढ़ाने के लिए एनडीपीएस अधिनियम की धारा 36-ए (4) का उपयोग।
9. बरी हुए मामलों का विश्लेषण और तथा आवश्यकतानुसार अपील दर्ज करना।
10. पीआईटी एनडीपीएस अधिनियम, 1988 का कार्यान्वयन।
11. एनडीपीएस अधिनियम के अध्याय-5ए के तहत संपत्ति का अधिग्रहण।
12. ड्रग्स के कारण हुई मौतों के मामलों की नजदीकी निगरानी।
13. जब्त दवाओं का विस्तृत पूर्व-परीक्षण एवं उत्तर परीक्षण के बाद सही निपटान।
14. 181 दवा युक्तियों का प्रभावी सत्यापन।
15. जांच अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम।
16. जेल में ड्रग्स के तस्करों पर कड़ी नजर रखने के लिए जेल विभाग के साथ समन्वय।
17. यूएनओडीसी, एनसीबी, बीएसएफ, दिल्ली पुलिस, सीमा शुल्क, आईबी, डीआरआई और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय।
25 हजार हेरोइन के एडिक्ट है
सरकार द्वारा डी-एडिक्शन के मोर्चे पर आउट-पेशेंट ओपियोड असिस्टेड ट्रीटमेंट क्लीनिक में किया जा रहा है। मरीजों के इलाज को बड़ी सफलता हासिल हुई है। वर्तमान में कुल 168 ओट क्लीनिक चल रहे हैं, जिनमें 63,000 से अधिक नशा प्रभावित मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इनमें से लगभग 25,000 हेरोइन के एडिक्ट मरीज हैं। इसकी प्रतिधारण दर 91.71 फीसदी है। वर्ष 2018 के दौरान सरकारी एवं गैर सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में लगभग 3 लाख मरीजों का इलाज किया गया है।
अब एमएलए भी बनेंगे डेपों प्रोग्राम का हिस्सा
ड्रग्स रोकथाम के मोर्चे पर राज्य सरकार के सभी विभागों के सक्रिय सहयोग व समन्वय के साथ बड़ी और डेपो कार्यक्रम पूरे राज्य में सफलतापूर्वक लागू किए गए हैं। डेपो कार्यक्रम के तहत लगभग 5 लाख डेपो पंजीकृत किए गए हैं। इसमें पंच, सरपंचों और जिला परिषद मेंबरों को जोड़ने के बाद एमएलए भी जोड़े जाएंगे। 1500 क्लस्टर समन्वयक और 15,000 नशा रोकथाम निगरानी समितियों को 523 मास्टर प्रशिक्षकों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है। अब तक 15,000 से अधिक सेमिनारों/बैठकों/रैलियों/जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। बड़ी प्रोग्राम के तहत लगभग 329 मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण दे रहे हैं। 3 लाख स्कूल शिक्षक/कॉलेज व्याख्याता चुने गए हैं जो राज्य के लगभग 40 लाख स्कूल/कॉलेज/विश्वविद्यालय के छात्रों को कौशल प्रदान करेंगे। इसके तहत 27 लाख छात्रों को पहले ही कवर किया जा चुका है।