ग्यासपुरा इलाके में केंद्र सरकार के स्कीम के तहत झुग्गी झोंपड़ी वालों के लिए बनाए गए फ्लैटों पर हुए कब्जे खाली करवाने के दौरान वीरवार को निगम और पुलिस टीम का कब्जाधारियों के साथ टकराव हो गया। पुलिस ने भीड़ को काबू करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें 12 से ज्यादा कब्जाधारी और तीन पुलिस मुलाजिम घायल हो गए जिनमें दो महिला मुलाजिम शामिल हैं।
वीरवार सुबह 350 से ज्यादा पुलिस मुलाजिमों के साथ नगर निगम की टीम प्लैटों में नाजायज तौर पर कब्जा कर बैठे लोगों को हटाने के लिए पहुंची। निगम के एडिशनल कमिश्नर घनश्याम थौरी कार्रवाई की अगुवाई कर रहे थे। पुलिस ने पहले इलाके को घेर लिया। उसके बाद फ्लैट खाली करवाने की कार्रवाई शुरू की गई। इस पर फ्लैटों पर कब्जा कर बैठे लोगों ने इसका विरोध किया। लोगों ने पुलिस टीम का घेरा तोड़ने की कोशिश की, जिस पर पुलिस ने भीड़ पर काबू करने के लिए लाठीचार्ज किया।
ग्यासपुरा इलाके में पिछली यूपीए सरकार की जेएनएनआरयूएम योजना के तहत 2200 फ्लैटों का निर्माण किया गया था। इनमें से करीब 1400 फ्लैट तो निगम की तरफ से अलग-अलग झुग्गी झोंपड़ी वालों को अलॉट कर दिए गए थे। फ्लैटों में करीब 250 से ज्यादा लोग नाजायज तौर पर आकर कब्जा कर चुके थे। इन लोगों का दावा था कि यह फ्लैट नगर निगम के कुछ मुलाजिमों और इलाके के लोगों ने पैसे लेकर उन्हें दिए हैं। इस संबंध में एक व्यक्ति और पुलिस में केस भी दर्ज करवाया जा चुका है। इन लोगों का सर्वे करने के बाद अब तक नगर निगम चार बार फ्लैट खाली करने की कार्रवाई में फेल हो चुका है।
वीरवार सुबह नगर निगम के कर्मी पुलिस मुलाजिमों के साथ ग्यासपुरा पहुंचे। जहां पुलिस टीम की अगुवाई एडीसीपी हेडक्वार्टर ध्रुव दहिया कर रहे थे। दूसरी तरफ निगम के एडिशनल कमिश्नर घनश्याम थौरी, जोनल कमिश्नर धर्म सिंह अगुवाई कर रहे थे। इस दौरान बीएसयूपी की डेवलपमेंट अफसर संगीता भी मौजूद थी। निगम मुलाजिमों ने लोगों की तरफ से जिन फ्लैटों पर ताले लगाए हुए थे, उनके ताले तोड़ कर खाली करवाने शुरू कर दिए गए। इस पर लोगों ने हंगामा किया, जिस कारण हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा था। निगम टीम ने सभी फ्लैट वालों का सामान कब्जे में ले लिया और उन्हें नगर निगम की घोड़ा फैक्टरी गोदाम में छोड़ दिया। लाठीचार्ज के दौरान पुलिस ने कुछ कब्जाधारियों को हिरासत में लिया, जिन्हें देर शाम छोड़ दिया।
निगम अफसरों पर लापरवाही बरतने का आरोप
नगर निगम ने पिछले साल झुग्गी झोंपड़ी वालों को फ्लैट अलॉट किए थे। इस दौरान भी जब 1400 लोग वहां शिफ्ट हो गए तो बाकी खाली फ्लैटों पर माफिया ने नजर रख ली। लोगों ने आरोप लगाया कि नगर निगम अधिकारियों की निगरानी में कुछ लोगों ने तीस तीस हजार रुपये लेकर वहां फ्लैट लिए। अगर नगर निगम के मुलाजिम ड्यूटी निभाते तो फ्लैटों पर कब्जा न होना था और न ही पुलिस को आज की कार्रवाई करने की जरूरत पड़ती।
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कार्रवाई के दौरान निगम के जितने भी फ्लैटों पर कब्जे हुए थे, उन्हें खाली करवा लिया गया है। अब जिन लोगों को यह फ्लैट पहले ही अलॉट किए जा चुके हैं, उन्हें कब्जा दे दिया जाएगा।
घनश्याम थौरी, एडिशनल कमिश्नर, नगर निगम