कनाडा में राजनीतिक शरण और स्थायी निवास (पीआर) पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों और झूठे दावों के बढ़ते मामलों के खुलासे से भारतीय, खासकर पंजाबी समुदाय में गहरी चिंता व्याप्त है।
हाल ही में कनाडा की एक संघीय अदालत ने पंजाब के गुरदासपुर जिले के जैतो सरजा निवासी गगनदीप सिंह की शरण याचिका खारिज कर दी। 20 नवंबर को न्यायमूर्ति डेनिस गैस्कॉन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता भारत में सुरक्षित आंतरिक यात्रा के विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद उत्पीड़न का ठोस सबूत पेश करने में असफल रहा। अदालत ने माना कि स्टूडेंट वीजा पर कनाडा पहुंचा गगनदीप न तो खालिस्तान समर्थक है और न ही समलैंगिक, जैसा कि उसने दावा किया था। इसके बाद उसके डिपोर्टेशन के आदेश जारी कर दिए गए।
-सीमा सुरक्षा को मजबूत करना।
-संगठित अपराध से निपटना।
-आव्रजन और शरण प्रणाली की दक्षता बढ़ाना।
-आपात स्थितियों में आवेदन रोकने या दस्तावेज निलंबित करने की शक्तियां अधिकारियों को देना।
-कंसल्टेंट कंपनियों पर भी सवाल।
पीआर नीतियों में बदलाव का सबसे ज्यादा असर पोस्ट ग्रेजुएट वर्क परमिट (पीजीडब्ल्यूपी) धारकों पर पड़ा है। पीआर के इंतजार में बैठे हजारों युवाओं के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता खड़ी हो गई है। इसका असर पंजाब तक साफ दिख रहा है जहां इमिग्रेशन सेंटर बड़ी संख्या में बंद हो चुके हैं। भारी किराया और स्टाफ खर्च वहन न कर पाने के कारण कई संचालकों ने अपने लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं। भारतीय समुदाय का साफ कहना है कि फर्जीवाड़े के खिलाफ सख्ती जरूरी है लेकिन ईमानदार और योग्य आवेदकों के हितों की भी रक्षा होनी चाहिए।