पूर्व सैनिक ने छत की संतीर से फंदा लगाकर इहलीला समाप्त कर ली।
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पुलिस से परेशान सब इंस्पेक्टर के बेटे ने घर में फंदा लगाकर सोमवार को आत्महत्या कर ली। इस दौरान उसकी मां और भाई उसे झूठे केस से निकलवाने के लिए थाना सिटी पुलिस द्वारा मांगी गई रिश्वत का हिस्सा देने थाने गए थे।
जानकारी मिलते ही पुलिस वाले और मां-बेटा सिविल अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में परिवार ने थाना सिटी के प्रभारी समेत अन्य मुलाजिमों से हाथापाई की। परिवार के गुस्से को देखते ही पुलिस अधिकारी मौके से चले गए। इस संबंध में डीएसपी हरिंदर सिंह परमार ने कहा कि इस मामले में परिवार के बयानों के बाद कार्रवाई की जाएगी।
स्वर्गीय सब इंस्पेक्टर की पत्नी जसबीर कौर ने बताया कि उनके पति की मौत के बाद उनकी जगह पर बेेटे जोगा सिंह (22) को नौकरी मिलनी थी। पिछले साल अगस्त में एक दिन जोगा सिंह तहसील रोड पर जा रहा था। इसी दौरान उसका मोबाइल गिर गया और मोबाइल उठाते समय वहां से गुजर रही दो लड़कियों के साथ उसका विवाद हो गया।
मौके पर पहुंची पुलिस ने लड़कियों की शिकायत मिले बिना ही उसके बेटे पर पर्चा दर्ज कर लिया और उसे जेल भेज दिया। जेल से आने के बाद उसके बेटे ने उन लड़कियों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि उसके खिलाफ उन्होंने कोई शिकायत नहीं दी थी। लड़कियों ने बाकायदा उसके हक में हल्फिया बयान भी दिया था। वह जोगा पर दर्ज झूठे मामले को खारिज कराने के लिए थाना सिटी से गुजारिश कर रहे थे।
केस का जांच अधिकारी उनको कोई ठोस भरोसा नहीं दे रहा था। रविवार को जांच अधिकारी ने जोगा सिंह को केस से निकालने के लिए एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी। इस पर सोमवार को वह अपने बड़े बेटे सतनाम सिंह के साथ रिश्वत की रकम में से दस हजार रुपये देने थाना सिटी गए थे। उनके जाने के बाद जोगा सिंह ने घर पर ही फंदा लगा लिया। जोगा सिंह की मौत के लिए परिवार ने पुलिस को दोषी ठहराया है।