एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग ने 23 करोड़ रुपये के जाली सी फार्म और वैट चोरी के मामले का परदाफाश किया है। मंडी गोबिंदगढ़ की इकाई वर्ल्ड वाइड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने दिल्ली की एक कंपनी को 23 करोड़ रुपये की स्टील की कुर्सियां बेचने के संबंध में जाली सी फार्म जमा कराने का खुलासा हुआ है। डिप्टी एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर जेके जैन ने इसकी पुष्टि की है।
जैन का कहना है कि वर्ल्ड वाइड कंपनी ने दिल्ली की कुछ फर्मों को स्टील की कुर्सियां सप्लाई कीं। यदि कोई कंपनी सूबे से बाहर सामान की सप्लाई करती है तो दो फीसदी सीएसटी लगाकर माल भेजती है। सीएसटी में रियायत लेने के लिए कंपनी को सूबा सरकार के पास सी फार्म जमा कराना पड़ता है। यदि सी फार्म जमा न कराया जाए तो कंपनी को 14.3 फीसदी वैट जमा कराना पड़ता है।
डीईटीसी जैन ने कहा कि वर्ल्ड वाइड कंपनी ने 22.53 करोड़ रुपये के 11 अलग अलग तरह के सी फार्म जमा कराए। कंपनी ने सीएसटी में दो फीसदी टैक्स भी जमा कराया था। विभाग को इस लेन देन पर शक हुआ। इसके बाद नई दिल्ली स्थित ट्रेड एवं टैक्स विभाग से तथ्यों का मिलान किया गया।
दिल्ली के विभाग ने अपने पत्र में साफ किया कि वर्ल्ड वाइड प्रोडक्ट्स द्वारा पेश किए सी फार्म जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में जमा कराए सी फार्म जाली हैं। फर्म को अब 14.3 फीसदी वैट अदा करना था। जैन ने कहा कि फर्म ने अपनी आयकर रिटर्न में भी दो फीसदी वैट अदा करने का जिक्र किया है, जो गैर कानूनी है। जैन ने कहा कि इस संबंध में मंडी गोबिंदगढ़ की पुलिस को केस दर्ज करने के लिए लिखा गया है। साथ ही इस मामले में विभागीय जांच भी की जाएगी।