काउंटर इंटेलीजेंस पुलिस और सेहत विभाग की ओर से जब्त किए करीब 21 हजार 752 नकली प्लेटलेट्स के पैकेट को नष्ट करने के अदालत ने सिविल सर्जन को आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं सिविल सर्जन की ओर से प्लेटलेट्स को नष्ट करने के लिए एक बोर्ड का गठन कर दिया गया है।
उक्त नकली प्लेटलेट्स वीरवार को नष्ट किए जाने थे, लेकिन सेहत विभाग को प्रदूषण बोर्ड की ओर से अनुमति नहीं मिलने से नष्ट नहीं किए जा सके। वहीं जांच में सामने आया है कि आरोपी दिलबाग सिंह और परमजीत सिंह साथ में काम करते थे। आरोपी दिलबाग सिंह नेपाल में भी काम कर चुका है।
पुलिस जांच के अनुसार मुंबई की रिलायंस लाइफ साइंसेज कंपनी ने आरोपी दिलबाग सिंह से 5 हजार लीटर प्लेटलेट्स का 1.25 करोड़ रुपये में सौदा किया था। बठिंडा के एक होटल में उक्त कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर प्लाजमा के पद पर तैनात जाहिर वोहरा के साथ उक्त डील की गई थी। एआईजी मलूजा ने बताया कि जिस होटल में डील हुई उस होटल के सीसीटीवी फुटेज चेक की जा रही है।
यह है मामला
काउंटर इंटेलिजेंस और सेहत विभाग ने बीते सोमवार को एक सांझे ऑपरेशन के तहत जिले के गांव बीड बहमण के पास बने एक मकान में छापामारी कर टैंकर को जब्त किया था। इसमें से करीब 21 हजार 752 नकली प्लेटलेट्स की थैलियां बरामद की गई।
आरोपियों ने रिलायंस कंपनी के साथ लाखों रुपये का सौदा कर असली प्लैटलेट्स तैयार करके देने थे। खून का इंतजाम ने होने के चलते आरोपियों ने सिंथेटिक प्लेटलेट्स को तैैयार करने के लिए 4 हजार लीटर दूध, 500 अंडे, 1 किलो मीठा सोडा, 3 किलो रिफाइंड तेल का उपयोग किया था।
सेहत विभाग के अनुसार उक्त तैयार किए गए नकली प्लैटलेट्स की पीएच 7 है, जो कि पूरी तरह तेजाब है। टीम ने आदेश अस्पताल के ब्लड इंचार्ज दिलबाग सिंह, मैक्स अस्पताल के लैब टेक्नीशियन परमजीत सिंह के अलावा भट्टी रोड पर स्थित सुखमनी फार्मा के संचालक परमजीत सिंह, परमजीत के भाई नरेंद्र सिंह और कंटेनर चालक लाल बहादुर को गिरफ्तार किया था।