कोरोना वायरस को लेकर लगाए कर्फ्यू के दौरान जिले में फंसे कश्मीरियों में से लगभग 100 को बुधवार को सरकार ने पीआरटीसी की तीन बसों के जरिये जम्मू-कश्मीर रवाना किया। लेकिन जैसे ही बसें तरनतारन बार्डर पर पहुंची तो वहां तीनों बसों में बैठे कश्मीरियों को वापस बठिंडा भेज दिया गया। वापस पहुंचे कश्मीरी छात्र समीर अहमद, फयाज अहमद, मोहमद रफीक और खादिम खान ने कहा कि कोरोना ने तो अपनों को बेगाना बना दिया।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि वह बडे़ चाव के साथ बसों में बैठे थे कि कुछ घंटों के बाद अपने परिवार के बीच जम्मू-कश्मीर में होंगे। लेकिन दोपहर जैसे ही वह तरनतारन के समीप लगते जम्मू बार्डर पर पहुंचे तो वहां पर उन्हें जम्मू कश्मीर में दाखिल नहीं होने दिया। उन्होंने बताया कि जम्मू सरकार के प्रतिनिधि ने उनके साथ गए पुलिस सुरक्षा कर्मियों एवं अन्य अधिकारियों को कहा कि सरकार ने बठिंडा से वापस आने वाले कश्मीर के लोगों संबंधी तैयारी नहीं की है। जिस कारण वो अभी कश्मीर के लोगों को अपने राज्य में दाखिल नहीं होने दे सकते।
कश्मीरियों ने बताया कि अब जम्मू सरकार के प्रतिनिधि ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह दो-चार दिन में उनको वापस जम्मू कश्मीर बुला लेंगे। जम्मू कश्मीर के चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर की ओर से जो पत्र पंजाब सरकार एवं जिला प्रशासन को भेजा गया था उसमें उन्होंने उन 28 कश्मीरी छात्रों को जम्मू कश्मीर भेजने का जिक्र किया था, जो आईएचएम में पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन जिला प्रशासन एवं सरकार ने बिना कोई ठोस बात किए ही 100 कश्मीरियों को बठिंडा से जम्मू के लिए रवाना कर दिया था।
विज्ञापन
100 लोगों में छात्रों के अलावा कपड़े बेचने वाले कश्मीरी शामिल
बुधवार को जिन सौ कश्मीरी लोगों को पीआरटीसी की बसों के जरिये जम्मू भेजा गया, उनमें छात्रों के अलावा कपड़े बेचने एवं गांव कोटश्मीर में काम करने वाले कश्मीरी शामिल हैं।
वापस भेजे लोगों का हर किस्म से ख्याल रखा जाएगा: मनप्रीत
वित्तमंत्री मनप्रीत बादल की टीम के सदस्य मोहम्मद अशरफ का कहना था कि जम्मू कश्मीर सरकार ने चाहे कश्मीरियों को जम्मू में दाखिल नहीं होने दिया और बठिंडा वापस भेज दिया। लेकिन अब उनकी तरफ से जिले में रह रहे सभी कश्मीरी भाइयों को राशन एवं खाने पीने का समान मुहैया करवाया जाएगा और उनका हर किस्म से ख्याल रखा जाएगा।
बरनाला में फंसे 60 कश्मीरी, जम्मू-कश्मीर की पुलिस का सिपाही भी
कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन की वजह से शहर के किला मुहल्ला व पत्ती रोड के क्षेत्र में 60 कश्मीरी फंस गए हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक कांस्टेबल मंजूर अहमद शेख , छह महिलाएं व चार पांच बच्चे भी शामिल हैं। इनके पास अब न तो रुपया बचा है और न ही घरेलू जरूरत का कोई सामान ही है। सभी जल्द से जल्द अपने घर लौटना चाहते हैं।
आतंकवादियों के ग्रेनेड हमले से बचे पुलिस कांस्टेबल मंजूर अहमद शेख ने बताया कि इलाज के लिए उसने दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में डाक्टर से 18 मार्च का समय लिया था। डाक्टर को मिलने के बाद वह बरनाला शहर में कुछ समय से रह रहे अपने रिश्तेदारों के पा आ गया। जाने से पहले ही देश भर में लॉकडाउन लागू हो गया और आवाजाही के सभी साधन बंद हो गए।
उसने बताया कि किला मुहल्ला क्षेत्र में कश्मीर के 26 व्यक्ति पांचकमरों में रह रहे हैं, इसके वलावा पत्ती रोड क्षेत्र में भी विभिन्न कमरों में 34 व्यक्ति अलग रह रहे हैं, जिनमें 6 महिलाएं व चार पांच बच्चे भी हैं। जसमीन, बानो व सिमरन वानो मे भरे मन से कहा कि पवित्र रमजान का महीना शुरू होने में तीन दिन बाकी हैं, 3 मई तक लाकडाउन का एलान पहले ही हो चुका है, जो और भी बढ सकता है। अब तो उनके पास राशन, दवा के लिए रुपये भी नही हैं।
इसी तरह की कहानी गुलजार अहमद, शेख, इमतियाज अहमद शेख, जावेद अहमद शेख, नसीर पीर, मंजूर अहमद मलिक, मंजूर, अहमद डार, फरूक अहमद शाह, शकील अहमद मीर, अब्दुल हमीद मीर, अब्दुल रसूल मीर व अलजात मीर की थी। सिपाही मंजूर अहमद शेख ने बताया कि वह तीन बार कश्मीर जाने के लिए ई-पास के लिए अप्लाई कर चुके हैं, लेकिन उनको पास बनाकर नही दिए जा रहे।
संपर्क करने पर एसडीएम अनमोल सिंह धालीवाल ने कहा कि बरनाला क्षेत्र में रह रहे कश्मीरी लोगों की सूचना मिलने पर उनके बारे आज ही डिटेल रिपोर्ट सरकार को भेजी जा रही है। पठानकोट से भेजे गए कश्मीरियों के संबंध में वहां के डीसी से बात की गई, लेकिन उन्होंने भेजे कश्मीरियों को वहां की सरकार ने अभी तक मंजूरी नही दी। एसडीएम ने कहा कि कश्मीरियों के साथ भी बात हो चुकी है, प्रशासन की तरफ से इनको कोई भी परेशानी नही आने दी जाएगी।