मानसा की अदालत ने भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के जिलाध्यक्ष राम सिंह भैणीवाघ समेत यूनियन के 33 नेताओं और वर्करों को एक केस में बरी कर दिया है।
थाना सदर मानसा पुलिस ने 29 जुलाई 2013 को पंजाब राज पावर कारपोरेशन मानसा डिवीजन के एसडीओ की लिखित शिकायत के आधार पर किसान नेताओं पर पर्चा दर्ज किया था। इसमें जत्थेबंदी के जिलाध्यक्ष राम सिंह भैणीवाघा, जगदेव सिंह भैणीवाघा, भान सिंह बरनाला, जगसीर सिंह दोदड़ा, बब्बू सिंह दोदडा, गुरजीत सिंह टाहलिया, साधू सिंह अलीशेर, इकबाल सिंह फफड़े भाईके समेत 33 वर्कर नामजद थे। थाना सदर मानसा की पुलिस ने इन नेताओं को 27 जून 2014 को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। उक्त सभी किसान नेता मानसा की तामकोट जेल में 20 दिन बंद रहने के बाद जमानत पर रिहा होकर आए थे। अदालत में चालान पेश होने के बाद एडिशनल चीफ जुडीशियल मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह चीमा की अदालत में 16 माह चले केस के दौरान वीरवार को जत्थेबंदी के एडवोकेट ललित कुमार अरोड़ा की दलीलों के साथ सहमत होते हुए यूनियन के जिलाध्यक्ष राम सिंह भैणीवाघा समेत 33 नेताओं व वर्करों को बरी कर दिया गया है।