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ब्लैंक चैक न देने के कारण दलित विद्यार्थियों को विद्यक संस्था ने खरी-खोटी सुनाई

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ब्लैंक चेक न देने पर अनुसूचित जाति के बच्चों को भेजा घर
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एसडीएम रायकोट ने दिए जांच के आदेश, शिक्षा से वंचित करने का आरोप
बाबा श्री चंद कालेज आफ मैनेजमेंट नूरपुरा (रायकोट) के प्रबंधकों के खिलाफ जांच शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
हलवारा (लुधियाना)। बाबा श्री चंद कालेज आफ मैनेजमेंट नूरपुरा (रायकोट) के प्रबंधकों की ओर से ब्लैंक चेक देने से मना करने पर संस्था की टॉपर रमनदीप कौर (गांव रज्जोवाणा खुर्द) समेत आधा दर्जन होनहार अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को शिक्षा से वंचित कर घर भेज दिया। छात्राओं के परिजनों ने वीरवार को आल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्यकारी के मेंबर संतोख गिल, सीटू के सूबा सचिव दलजीत कुमार गोगा, पार्षद सुरिंदर सिंह की मौजूदगी में एसडीएम रायकोट डॉक्टर हिमांशु गुप्ता से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि लड़कियां पिछले कई दिनों से मानसिक पीड़ा के कारण परेशानी झेल रही हैं। उन्हें डर है कि मानसिक परेशानी में कोई बच्चा ऐसा कदम न उठा ले, जिस कारण उन्हें जिंदगी भर रोना पड़े। संस्था की टॉपर छात्रा रमनदीप कौर के पिता रणजीत सिंह, गांव बुर्ज हरी सिंह के दास सिंह और रामपाल सिंह के अलावा जसपाल सिंह और जगजीत सिंह निवासी रायकोट ने एक लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि कंप्यूटर एप्लीकेशन की ग्रेजुएशन कर रही छात्राओं से विद्यक संस्था के प्रबंधकों ने पहले तो उनसे किसी तरह की कोई फीस न लिए जाने का बयान ले लिया और वसूली गई फीस की रसीद भी नहीं दी। जो रसीद पहले दी थी वह भी बहाने से वापस ले ली। अब विद्यार्थियों को सरकार की ओर से वजीफे की रकम उनके बैंक खातों में डाली गई तो संस्था के प्रबंधकों ने विद्यार्थियों को एक खास बैंक शाखा में खाता खुलवाने के लिए मजबूर किया और उनकी पासबुक भी कालेज प्रबंधकों ने अपने पास रख ली और अब दो-दो खाली चेक पर साइन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। चेक न देने की हालत में बेटी पढ़ाओ नारे की धज्जियां उड़ाते हुए विद्यक संस्था ने अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को घर भेज दिया। एसडीएम रायकोट डॉ. हिमांशु गुप्ता ने विद्यक संस्था के इस कदम को गंभीर बताते हुए तहसील समाज भलाई आफिसर को जांच के बाद रिपोर्ट पेश करने के हुकम जारी कर दिए हैं। इस संबंध में कालेज प्रबंधक कमेटी के प्रधान मुनीष दास ने विद्यार्थियों की ओर से लगाए आरोपों को नकारते हुए कहा कि वह कार्रवाई कानून के अनुसार ही कर रहे हैं। हालांकि जिला भलाई आफिसर जसवंत सिंह का कहना है कि प्रबंधकों को खाली चेक लेने का कोई हक नहीं है, प्रबंधक सरकार को खुद यह अंडरटेकिंग देते हैं कि वह विद्यार्थी के खाते में स्कॉलरशिप आने के बाद फीस खुद वसूल लेंगे। अगर वह फीस वसूलने से असमर्थ हों तो फीस के पैसे सीधे उनके खाते में डाले जा सकते हैं।
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