वूल एंड वूलंस प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन का पद विवादों के घेरे में
लुधियाना में हुई बैठक में निकाली भड़ास, नामांकन पत्र में गलत तथ्य पेश करने के लगाए आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। वूल एंड वूलंस एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन पद का चुनाव विवादों के घेरे में आ गया है। देश के वूल एंड वूलन उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बनी यह संस्था निर्वाचित चेयरमैन से नाखुश है। काउंसिल की कार्यकारिणी कमेटी के सदस्यों ने ही चेयरमैन पर नामांकन पत्र में गलत तथ्य पेश करके इस पद पर काबिज होने के आरोप लगाए हैं। दूसरी तरफ इस मामले की भारत सरकार के टैक्सटाइल मंत्रालय ने जांच और समीक्षा शुरू कर दी है। इस संबंध में एक कमेटी आफ एडमिनिस्ट्रेशन के सदस्य आरसी खन्ना, डीके जैन अमृतसर, रोमेश लाल खजूरिया दिल्ली और अफाक कादरी श्रीनगर ने लुधियाना में एक होटल में प्रेसवार्ता के दौरान काउंसिल के चेयरमैन रजनीश घई पर आरोप लगाते हुए कहा कि 13 अगस्त 2018 को चेयरमैन द्वारा लुधियाना कार्यालय में प्रबंधकीय कमेटी की एक बैठक में अपना वर्चस्व सिद्ध करने के लिए संविधान के नियमों के खिलाफ अवैध तरीके से 4 को-आप्ट मेंबर्स को कमेटी में शामिल कर लिया गया। जबकि नियमों के अनुसार चेयरमैन केवल दो को-आप्ट सदस्य ही बना सकता है। आरसी खन्ना, डीके जैन और खजूरिया ने आरोप लगाते हुए कहा कि चेयरमैन घई ने अभी तक अपनी फर्म के निर्यात संबंधी दस्तावेज मंत्रालय को नहीं भेजे हैं, जबकि यह समय सीमा के भीतर भेजे जाने थे। उन्होंने कहा कि काउंसिल की लुधियाना में हुई बैठक के दौरान पूर्व चेयरमैन सुशील कौड़ा को वर्तमान चेयरमैन ने बैठक में शामिल करने से इंकार कर दिया। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले की गंभीरता से जांच की जाए और पूरी पारदर्शिता से सच्चाई को सामने लाया जाए। इस संदर्भ में चेयरमैन रजनीश घई से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो पाई।