रोजगार की चाह में पठानकोट से स्पेन जा रहे पठानकोट के 2 युवकों को एजेंटों ने बेलारूस के जंगल में छोड़ दिया। इनमें से एक युवक लतीविया पुलिस के कैंप में है, जबकि, दूसरे का कोई अता-पता नहीं है। लापता गांव स्यूंटी निवासी 28 साल का करण सिंह ठाकुर के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
परिवार के मुताबिक उन्हें 15 अप्रैल को आखिरी बार करण का फोन आया था, जिसमें उसने बताया कि 4 दिन से बर्फ में चल रहे हैं। खाने के लिए रोटी नहीं और पीने के लिए पानी नहीं है। बर्फ में चलने से पैर गलने लगे हैं। परिवार का कहना है कि उनके बच्चों की दुर्दशा के जिम्मेदार एजेंटों ने अपने फोन बंद कर लिए हैं। उन्होंने पंजाब और केंद्र सरकार से उनके बच्चों को वापस लाने की अपील की है।
स्पेन के बजाय ले गए दुबई, फिर बेलारूस के जंगलों में छोड़ा
करण सिंह ठाकुर के पिता रघुनाथ सिंह ने बताया कि उनके 3 बच्चे हैं, जिसमें से उनका बड़ा बेटा करण सिंह काम की तलाश में इस साल जनवरी में किसी प्राइवेट एजेंट से स्पेन जाने के लिए मिला था। एजेंट ने उनसे 14 लाख रुपये की मांग की और वादा किया कि करण को सीधे रास्ते से स्पेन भेजा जाएगा।
करण और अश्वनी ने 10 जनवरी को स्पेन की फ्लाइट लेने के लिए दिल्ली हवाई अड्डे पहुंचे, लेकिन एजेंट ने उन्हें दुबई उतरवा दिया। कुछ दिन दुबई रहने के बाद उन्हें दिल्ली वापस लाया गया, जहां से बस के जरिये लखनऊ भेज दिया। लखनऊ हवाई अड्डे से इन्हें रूस भेज दिया गया। रघुनाथ ने बताया कि रूस से करण, अश्वनी और बटाला के प्रभजोत को एक टैक्सी में बिठाकर बेलारूस के जंगलों में छोड़ दिया गया, जहां पर वह कई दिनों तक भटकते रहे। 15 मार्च को परिवार की करण के साथ आखिरी बातचीत हुई, जिस दौरान उसने बताया कि वह 4 दिनों से बिना कुछ खाए पिए भटक रहे हैं। इसके बाद परिवार का करण से संपर्क नहीं हो पाया।
साथ गए युवकों को पुलिस ने पकड़ लिया
करण के साथ गए उसी के गांव के अश्वनी और बटाला के प्रभजोत को सुरक्षा अधिकारियों ने पकड़कर एक कैंप में रखा है, लेकिन करण के बारे में अभी तक कोई खबर नहीं मिल पाई। करण के पिता रघुनाथ सिंह ने बताया कि अन्य लड़कों से पता चला कि बेलारूस के जंगल में करण उनसे बिछड़ गया था।
करण की माता दर्शना ने बताया कि सांसद सनी देओल के जरिये रूस की एबेंसी से संपर्क किया गया है। जहां से अश्वनी और प्रभजोत के बारे जानकारी मिली है, लेकिन अभी तक करण के बारे कोई खबर नहीं मिली। परिवार ने केंद्र सरकार से अपील की है कि उनके बेटे की बेलारूस के जंगल में खोज की जाए और उसे घर वापस पठानकोट भेजा जाए।