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बहिबल इंसाफ मोर्चा में दिखी फूट, गुरजीत सरावां के पिता साधु सिंह ने किया किनारा

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फरीदकोट के गांव सरावां में बातचीत करते बहिबल गोलीकांड में मरने वाले गुरजीत सिंह के पिता साधु सिं? - फोटो : FARIDKOT
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फरीदकोट। 2015 के बरगाड़ी बेअदबी व गोलीकांड की घटनाओं में इंसाफ के लिए 16 दिसंबर 2021 से गांव बहिबल कलां में चल रहे इंसाफ मोर्चे में दरार पड़ गई है और बहिबल गोलीकांड में जान गंवाने वाले गुरजीत सिंह सरावां के पिता साधु सिंह ने मोर्चे से किनारा कर लिया है। पीड़ित पिता ने एलान किया है कि वह मोर्चे की तरफ से 14 अक्टूबर को होने वाले शहीदी समारोह में भी भाग नहीं लेंगे और उस दिन उनका परिवार गांव सरावां में अपने घर पर ही बेटे की याद में पाठ का भोग डालेगा।
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जानकारी के अनुसार बेअदबी व गोलीकांड की घटनाओं को लेकर चल रहे संघर्ष के दौरान आपसी फूट का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2019 में लगातार छह माह तक चले बरगाड़ी इंसाफ मोर्चे में भी पंथक नेताओं की फूट उभर कर सामने आई थी। बहिबल इंसाफ मोर्चा पिछले साल 16 दिसंबर को बहिबल गोलीकांड में जान गंवाने वाले सिख नौजवान किशन भगवान सिंह व गुरजीत सिंह सरावां के परिवारों की अगुवाई में शुरू किया गया, जो निरंतर जारी है।
अब गुरजीत सिंह सरावां के पिता साधु सिंह ने मोर्चे से किनारा करने का फैसला कर लिया है। पीड़ित पिता साधु सिंह ने बातचीत के दौरान कहा कि इंसाफ मोर्चे की सारी गतिविधियों को किशन भगवान सिंह के बेटे सुखराज सिंह ही संचालित कर रहा है और उनके साथ किसी भी तरह का सलाह मशविरा या सहमति नहीं ली जा रही। उन्होंने इंसाफ मोर्चे वाले स्थान पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश किए जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्हें नहीं लगता कि हम मर्यादा का पालन कर पा रहे है। साधु सिंह ने कहा कि राज्य की सरकार ने मोर्चे के साथ तालमेल किया था और कार्रवाई के लिए छह माह का समय मांगा था लेकिन उनकी सलाह के बावजूद सरकार को तीन माह का समय नहीं दिया गया, जिसके चलते अब सरकार के साथ भी संपर्क टूट चुका है और इस बात को तीन माह से भी ऊपर का समय हो चुका है।
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उनका परिवार गोलीकांड की घटना वाले दिन 14 अक्टूबर को मोर्चा स्थल पर होने वाली शहीदी समारोह में शामिल नहीं होगा बल्कि उस दिन वह घर पर ही पाठ का भोग डालेगें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह मोर्चे के खिलाफ नहीं है लेकिन ज्यादा आयु होने की वजह से वह मोर्चे की गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि सड़कों पर बैठने या सड़क जाम करने से ही आम जनता ही परेशान होती है, इससे सरकारों को कोई फर्क नहीं पड़ता और न ही उन्हें इस तरह से न्याय मिल पाता है। सरकारें इंसाफ दें या न दें, उनका भरोसा सिर्फ वाहेगुरु पर है।
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