चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के पशुपालन और मत्स्य विभाग ने पारिस्थितिकी संतुलन (इकोलॉजिकल बैलेंस) के लिए सुखना लेक से बड़ी मछलियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए 13 से 22 मार्च तक एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। सुखना झील से बड़ी मछलियों को हटाने का कार्य वन विभाग की सिफारिश के बाद किया जाता है क्योंकि बीते वर्ष बरसातों के दौरान बड़ी संख्या में मछलियां मृत पाई गई थीं। मछलियां पकड़ने का काम छोटे आकार के जाल के साथ किया जाएगा ताकि छोटी मछलियां सुरक्षित हो सकें। जाल रात में 8 से सुबह 6 बजे तक लगाए जाएंगे ताकि सुखना लेक में रूटीन की मनोरंजक गतिविधियां किसी भी तरह से प्रभावित न हों। मछली पकड़ने का क्षेत्र अलग होगा और ये रेगुलेटरी एंड की ओर होगा। सुखना लेक में जल्द ही नई मछलियां भी छोड़ी जाएंगी। विभाग ये काम वन विभाग और पंजाब यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग के सहयोग से पूरा करेगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सुखना के पारिस्थितिकी संतुलन को बेहतर बनाना है। सुखना लेक एक छोटी झील है और बड़े जल निकायों या बहते पानी के विपरीत है। इस तरह की झीलों में वनस्पतियों और जीवों की अपनी अलग आवश्यकताएं होती हैं। ये परिवर्तनों के प्रति बहुत संवेदनशील होती हैं। बड़े आकार की मछलियों को हटाने से प्रवासी पक्षियों की बेहतर फीडिंग के लिए छोटी मछलियों की उपलब्धता होगी।