कोरोना महामारी के कारण अब लोगों को अपने धार्मिक रीति रिवाज भी बदलने पड़ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला वीरवार को फरीदकोट शहर में सामने आया जिसमें कोरोना के चलते जान गंवाने वाले महज डेढ़ साल के बच्चे का उसके परिवार को संस्कार करना पड़ा। हालांकि हिंदू धर्म की मान्यता व रीति के मुताबिक छोटे बच्चों की मौत होने पर उन्हें या तो दफनाया जाता है या फिर जल प्रवाह किया जाता है। कोरोना की हिदायतों के कारण परिवार की मांग के बावजूद प्रशासन ने बच्चे को दफनाने की इजाजत नहीं दी। इस मौके पर बच्चे के दादा के अलावा भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज के नौजवान नेता विकास चौहान ने सरकार व प्रशासन की इन हिदायतों के प्रति रोष जताते हुए कहा कि जब विदेशों में कोरोना से मरने वाले मरीजों को दफनाया जा सकता है तो यहां पर क्यों नहीं।