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पंजाब चुनाव: दोआबा-माझा में दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर, दोनों डिप्टी सीएम और भाजपा-कांग्रेस के प्रधान कड़े मुकाबले में फंसे

Sun, 20 Feb 2022 08:35 AM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

डेरा बाबा नानक विधानसभा सीट पर पिछले 10 साल से कांग्रेस के सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कब्जा किया हुआ है। इस बार के चुनाव में कांग्रेस की ओर से सुखजिंदर सिंह रंधावा एक बार फिर मैदान में हैं, जबकि आप की तरफ से गुरदीप सिंह रंधावा को टिकट दिया गया है।
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नवजोत सिद्धू, सुखजिंदर रंधावा, ओपी सोनी और अश्वनी शर्मा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब में आज मतदान है और नेताओं ने पूरी ताकत झोंक रखी है, इस बार मुकाबला चौकोना होने के कारण दिलचस्प है। पंजाब में माझा व दोआबा की सीटों पर ही सबकी नजर है, क्योंकि यहां से कई दिग्गज मैदान में हैं, जिनकी प्रतिष्ठा दांव पर है। दोआबा का 42 फीसदी वोट बैंक भी जीत हार का फैसला करने जा रहा है। माझा में 25 सीटें हैं, इस बार माझा से भाजपा प्रधान अश्वनी शर्मा पठानकोट से भाजपा की टिकट पर मैदान में हैं। वह दूसरी बार प्रदेशाध्यक्ष बने हैं। 

पठानकोट में त्रिकोणीय मुकाबला

पठानकोट की सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। पिछले चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था। सीधे मुकाबले में कांग्रेस ने विजय प्राप्त की थी। कांग्रेस उम्मीदवार अमित विज ने भाजपा के अश्वनी शर्मा को 11 हजार 170 मतों से हराया था। इस बार आप की एंट्री हो गई है, आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ रहे विभूति शर्मा भी राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। वह लंबे अरसे से कांग्रेस के साथ रहे। छह बार लगातार पार्षद बनकर जनता की सेवा की। आम आदमी पार्टी ने उन्हें पठानकोट से उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर दी थी। अब वहां कांटे की टक्कर है और मुकाबला दिलचस्प बन गया है। कुल मिलाकर अश्वनी शर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर है, वह भाजपा के प्रधान हैं और उनके विधानसभा हलके में पीएम मोदी रैली करके गए हैं।

डेरा बाबा नानक में पंजाब के डिप्टी सीएम मैदान में

डेरा बाबा नानक विधानसभा सीट पर पिछले 10 साल से कांग्रेस के सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कब्जा किया हुआ है। इस बार के चुनाव में कांग्रेस की ओर से सुखजिंदर सिंह रंधावा एक बार फिर मैदान में हैं, जबकि आप की तरफ से गुरदीप सिंह रंधावा को टिकट दिया गया है। अकाली दल की तरफ से रविकरण सिंह काहलों सियासी रण में किस्मत आजमा रहे हैं। यह सीट बहुत अहम है, क्योंकि पंजाब के डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा यहां से मैदान में हैं और कैप्टन अमरिंदर सिंह को सत्ता से हटाने में उनका योगदान रहा है। डेरा बाबा नानक विधानसभा सीट से 2017 में कांग्रेस के सुखजिंदर सिंह रंधावा ने 60385 वोटों के साथ जीत हासिल की थी। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के सुच्चा सिंह लंगाह को हराया था, जिन्हें 59191 वोट प्राप्त हुए थे, जबकि तीसरे नबंर 17222 वोटों के साथ आप के गुरप्रताप सिंह खुशालपुर रहे थे। इस बार रंधावा व काहलों के बीच जबरदस्त मुकाबला है। सुखजिंदर रंधावा के पिता संतोख सिंह रंधावा भी पीपीसीसी के प्रधान रह चुके हैं।

चौकोने मुकाबले में ओपी के सामने छठी जीत की चुनौती

अमृतसर की केंद्रीय सीट पर इस बार मुकाबला काफी रोचक है। यहां से वैसे तो छह प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, मगर प्रमुख रूप से चौकोना मुकाबला हो रहा है। पंजाब सरकार में उप मुख्यमंत्री ओम प्रकाश सोनी कांग्रेस से चुनाव मैदान में है। वह तीसरी बार इसी हलके से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके समक्ष भाजपा उम्मीदवार डॉ. राम चावला, आम आदमी पार्टी से डॉ. अजय गुप्ता, अकाली दल-बसपा गठजोड़ से बसपा उम्मीदवार दलवीर कौर मैदान में है। 1991 में अमृतसर के पहले महापौर चुने गए सोनी अमृतसर सेंट्रल के मौजूदा विधायक हैं। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने यहां अपने निकटम प्रतिद्वंद्वी और भाजपा प्रत्याशी तरुण चुघ को हराया था। सोनी 1997 में पहली बार विधायक चुने गए थे,  इसके बाद वह 2002, 2007, 2012 और 2017 में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहे। सबकी नजर इस बात पर है कि सोनी इस बार चौकोने मुकाबले में छठी बार जीत हासिल कर विधानसभा पहुंच पाते हैं या नहीं?

18 साल में पहली बार सिद्धू का मुकाबला टक्कर वाला

18 साल से सियासत कर रहे पीपीसीसी के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू को भी कड़ी टक्कर मिल रही है। इस बार अकाली दल के माझा के जरनैल बिक्रम सिंह मजीठिया मैदान में हैं। आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार जीवनजोत कौर भी पूरी ताकत झोंक रही है। भाजपा ने भी इस सीट पर बड़ा दांव खेल रखा है। रिटायर्ड आईएएस अफसर जगमोहन राजू को मैदान में उतारा है। 2017 में नवजोत सिंह सिद्धू ने बीजेपी के राकेश कुमार हनी को 42809 वोटों के अंतर से हराया था, जो पंजाब में सबसे अधिक लीड थी। हनी को महज 17 फीसदी वोट ही मिले थे, जबकि सिद्धू को 60 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। आप के सरबजोत सिंह धंजाल तीसरे नंबर पर रहे थे और 14 फीसदी मत के साथ कुल 14715 वोट ही पा सके थे। इस बार बिक्रम मजीठिया टक्कर दे रहे हैं और मामला फंस गया है।

राणा गुरजीत पुराना रिकॉर्ड कायम पाते हैं या नहीं

दशकों बाद विधानसभा हलका कपूरथला का चुनावी दंगल इस बार काफी रोचक होता दिख रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी दिग्गज नेता राणा गुरजीत सिंह को इस बार चुनाव में ताकत झोंक रहे हैं, ताकि अपना पुराना रिकार्ड कायम रख सकें। भाजपा ने शहरी क्षेत्र में सिख प्रत्याशी रंजीत सिंह खोजेवाल को टिकट दिया है, जिससे शहरी वोटरों का ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में होने की उम्मीद है। आप प्रत्याशी मंजू राणा ग्रामीण क्षेत्र में ताकत लगा रही हैं। 2002 में कांग्रेस के राणा गुरजीत सिंह ने 33715 वोट लेकर जीत हासिल की थी, जिन्होंने अकाली दल की तरफ से चुनाव लड़ने वाले रघबीर सिंह को हराया था। रघुबीर सिंह को कुल 23590 वोट मिले थे।। 2007 में राणा गुरजीत सिंह की पत्नी राणा राजबंस कौर ने रिकार्ड 47173 वोट हासिल कर विधानसभा का चुनाव जीता, जबकि अकाली दल के प्रत्याशी रघबीर सिंह ने भी रिकार्ड 40888 वोट हासिल किए, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2012 में राणा गुरजीत सिंह चुनाव लड़े और पिछले सारे रिकार्ड तोड़ते हुए 54221 वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की। अकाली दल के प्रत्याशी सर्बजीत सिंह मक्कड़ को 39739 वोट प्राप्त हुए थे। 2017 में राणा गुरजीत सिंह ने 56378 वोट हासिल कर बड़ी जीत हासिल की, जिन्होंने अकाली दल की तरफ से चुनाव लड़कर 27561 वोट हासिल करने वाले एडवोकेट परमजीत सिंह एडवोकेट को हराया था। अब भाजपा भी मैदान में आ गई है और आप ने तो पूर्व जज मंजू राणा को टिकट देकर मैदान में उतारा है।

होशियारपुर में दो पूर्व मंत्रियों की टक्कर

होशियारपुर से दो पूर्व कैबिनेट मंत्रियों की साख दांव पर है। जीत की हैट्रिक लगाने वाले भाजपा के तीक्ष्ण सूद का विजय रथ दस साल पहले कांग्रेस के सुंदर शाम अरोड़ा ने रोका था। अरोड़ा दो बार विजय का परचम फहरा चुके हैं। कांग्रेस सरकार में उनको मंत्री बनाया गया। करीबन आठ माह पहले कांग्रेस का हाथ छोड़कर आप की टोपी पहनने वाले ब्रह्म शंकर चुनाव मैदान में हैं और कांटे की टक्कर दे रहे हैं। पिछली बार आप के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले वरिंदर परिहार अब हाथी के टिकट पर मैदान में हैं। चुनावों में कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने होती थी, लेकिन इस बार राजनीति की बिसात चौकोनी है। भाजपा के तीक्ष्ण सूद भी कद्दावर नेता हैं और कैबिनेट मंत्री के साथ साथ वह सीएम के मुख्य सलाहकार भी रह चुके हैं।

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