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सिविल अस्पताल में फर्श पर प्रसव का मामला, एनसीएससी ने आईजी और डिवीजनल कमिश्नर को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

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पठानकोट। पठानकोट सिविल अस्पताल में भर्ती न किए जानेपर गर्भवती के फर्श पर हुए प्रसव के मामले में एनसीएससी (नेशनल कमीशन फॉर शेडयूल कास्ट) की एंट्री हो चुकी है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की ओर से वीरवार को देर रात डिवीजनल कमिश्नर, आईजी बार्डर रेंज समेत 6 अधिकारियों को नोटिस जारी कर 7 दिन में जांच कर रिपोर्ट समिट करने को कहा है। ऐसा न करने पर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर दिल्ली में आयोग के समक्ष उपस्थित होने की चेतावनी भी दी गई है। जिससे पठानकोट सिविल अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
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जारी आदेश में आयोग के रिसर्च ऑफिसर एपी गौतम ने लिखा कि पठानकोट से उन्हें रकित महाजन समेत कुछ अन्य लोगों ने मेल पर शिकायत दी थी। जिसमें बताया गया था कि एक दलित महिला को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया और उसके परिवार को परेशान किया गया। जिसके चलते उसका प्रसव सिविल अस्पताल के बरामदे में फर्श पर हुआ। इस मामले में आयोग ने जांच का फैसला किया है। आयोग ने डिवीजनल कमिश्नर जालंधर, आईजी बार्डर रेंज अमृतसर, डीसी पठानकोट, एसएसपी, सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और चीफ मेडिकल अफसर को नोटिस जारी किया। अधिकारियों को 7 दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
रिपोर्ट में घटना का पूरा ब्योरा, पीड़ित महिला की जानकारी, जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारियों के नाम, एफआईआर की जानकारी, गिरफ्तारी की जानकारी, चार्जशीट की रिपोर्ट और पीड़ित परिवार को दी गई सहायता का पूरा ब्योरा 6 अक्टूबर तक मांगा गया है। इसमें अधिकारियों को आगाह किया गया कि अगर निर्धारित समय में कार्रवाई की रिपोर्ट प्राप्त नहीं होती तो आयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत दीवानी अदालत की शक्तियों का प्रयोग कर सकता है और दिल्ली में आयोग के समक्ष व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए समन जारी किया जा सकता है। बता दें मामले में पहले से डीसी पठानकोट और सिविल सर्जन की ओर से जांच टीमों का गठन किया जा चुका है।
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