डलहौजी रोड पर हिंदू बैंक की मुख्य ब्रांच के बाहर धरने पर बैठे खाताधारक।
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80 करोड़ एनपीए को लेकर प्रतिबंध झेल रहे हिंदू को-ऑपरेटिव बैंक के खाताधारकों का गुस्सा फूट पड़ा। बैंक के कई खाताधारक बैंक के बाहर सड़क पर धरना लगाकर बैठ गए। खाताधारकों ने कहा कि एनपीए एकाउंटस के कारण आरबीआई द्वारा लगाई गई पैसों की निकासी पर पाबंदी से 14 माह से लोग अपने ही पैसे निकलवाने के लिए धक्के खा रहे हैं और लॉकडाउन में आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं।खाताधारक रजत बाली ने कहा कि जब तक उसके पैसे उसे वापस नहीं मिलते, तब तक वह यहां स्थायी धरने पर बैठा रहेगा। खाताधारकों ने रोष व्यक्त करते कहा कि खाताधारकों की मेहनत का पैसा जमा है और खुद के पैसे निकलवाने के लिए उन्हें परेशना होना पड़ रहा है। इमरजेंसी,बीमारी या अन्य जरूरी कामों के लिए भी खाताधारकों को पैसे नहीं दिए गए। जबकि इन 14 महीनों में बैंक ने अपने कर्मियों को पूरा वेतन दिया। जोकि सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि सरकार के आदेशों पर अधिकतर कर्मियों को डेपुटेशन पर भेजा जाना था लेकिन अभी तक उन्हें भी डेपुटेशन पर भेजा नहीं गया है। जिससे साफ है कि बैंक प्रबंधन की कार्यप्रणाली धीमी है। इससे यही संकेत हैं कि आगामी समय में बैंक के हालात बद से बदतर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि आखिरकार यह बैंक कब चलेगा। इसकी स्थिति सभी खाताधारकों को स्पष्ट की जाए, अन्यथा वह यहां बैठे रहेंगे। हिंदू बैंक की मुख्यशाखा के बाहर दिए गए धरने दौरान थाना प्रभारी देवेंद्र प्रकाश भी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वहीं, हिंदू को-ऑपरेटिव बैंक के सीईओ अमन मेहता का कहना है कि वे मानते हैं कि खाताधारक परेशान हैं। लेकिन इस समस्या का हल निकलने में समय लगेगा और 31 मार्च तक बैंक की ओर से रिकवरी कर करीब 25 करोड़ घाटे को कवर भी किया गया था। लेकिन, उसके बाद लॉकडाउन के कारण समय लग रहा है। इसके अलावा अधिक भर्ती की समस्या को भी पंजाब सरकार की ओर से हल करवाते हुए पहले 25 और अब 70 कर्मी डेपुटेशन पर भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इस बैंक को चलाने के लिए प्रयासरत है और जल्द खाताधारकों की समस्या का समाधान होगा।