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Jalandhar News: पोस्टमास्टर समेत तीन को अंतिम विदाई, बेटी व नातिन का संस्कार आज

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2003 के बाद कर्ज के बोझ तले दबता गया मनमोहन, पूरा परिवार कर लिया खत्म
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अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। डरौली खुर्द में दोनों बेटियां, नातिन की हत्या कर खुदकुशी करने वाले मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार गांव में कर दिया गया। उसके साथ उसकी पत्नी सर्बजीत कौर, बेटी गुरप्रीत कौर गोपी का संस्कार किया गया। जबकि उसकी दूसरी बेटी ज्योति व नातिन का संस्कार बुधवार को किया जाएगा। उसकी बेटी ज्योति का संस्कार उसके ससुराल द्वारा किया जाएगा।
डीएसपी विजय कंवर के मुताबिक, मनमोहन सिंह काफी कर्ज तले दब चुका था। उसने कुलविंदर कौर से साल 2003 में करीब 1.50 लाख रुपये लिए थे। इसका करीब 4 माह तक ब्याज दिया गया। लेकिन फिर आज कल करते-करते 20 साल निकाल दिए। ऐसे में पैसे बढ़ते-बढ़ते करीब 25-30 लाख बना दिए गए। 50 हजार रुपये के कुलविंदर कौर ने 8 लाख रुपये बना दिए। यह बात सुसाइड नोट में लिखी है। डीएसपी विजय कंवर के मुताबिक, सुसाइड नोट में मनमोहन सिंह ने किसी पर आरोप नहीं लगाया है जो उसको प्रताड़ित करता हो। इसलिए पुलिस ने किसी के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया है।
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हमारा संस्कार बिजली वाली भट्ठी या गैस चैंबर में किया जाए
मनमोहन ने लिखा कि अब कुछ नहीं हो सकता, सिवाय मैं मौत को गले लगा लूं और ये मुझे करना ही पड़ेगा। अगर ऐसा न किया तो पैसे लेने वाले वैसे भी नहीं छोड़ेंगे। दोनों के नोट साथ में लगा दिए गए हैं। मैं सबसे माफी मांगना चाहता हूं।
सरकार से मैं आस करता हूं कि सभी के जायज पैसे वापस किए जाएं, क्योंकि अब मेरे पास कोई पैसा नहीं बचा है। सारा पैसा एक-एक कर मांगने वालों को दे चुका हूं। हो सके तो हमारा संस्कार सरकार की ओर से शहर की बिजली वाली भट्ठी या गैस चैंबर में किया जाए। आप का बहुत-बहुत धन्यवाद होगा। उसका एक लाख का कर्ज ब्याज लगा 25 लाख का बना दिया। मैं 70 लाख दे चुका, फिर भी कर्ज खत्म ही नहीं हो रहा।
मैंने एक मुर्गीखाना खोला। पहले तो छह लाख रुपये का लोन लिया। मगर मुर्गी खाने का काम नहीं चल पाया। इसके बाद मैंने डाकखाने के फिक्स डिपॉजिट के सर्टिफिकेट छापने का काम शुरू किया। लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। फिर मैंने फिल्म बनाने वालों के साथ काम शुरू किया। वो भी काम नहीं चला और जो साथी थे वे भी पैसा लेकर भाग गए।
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सभी जगह पर पैसे उधार लेकर लगाए थे। उधार चुकाने के लिए और पैसे ब्याज पर लेने पड़ रहे थे। ये सभी बातें परिवार के किसी भी सदस्य को पता नहीं थी, क्योंकि डाकखाने में ही सारा पैसे के लेनदेन का काम हो जाता था। सारे पैसे का ब्याज हर माह करीब 50 हजार से ज्यादा हो गया था। अभी तक सभी करीब 70 लाख रुपये से ज्यादा पैसे ले भी चुके थे।
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