जालंधर। खालिस्तान अलगाववादी मेलबर्न में 29 जनवरी को खालिस्तान जनमत संग्रह रैली आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, इससे भारतीय मूल के जो लोग वहां स्थायी या अस्थायी तौर पर बसे हैं, उनमें बेचैनी बढ़ गई है। चिंता उन अभिभावकों की भी बढ़ गई है जिनके बच्चे ऑस्ट्रेलिया में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में अधिकारियों ने मामले की जांच के लिए सुरक्षा तंत्र के साथ काम करना शुरू कर दिया है क्योंकि यह वहां रहने वाले भारतीय ऑस्ट्रेलियाई और ऑस्ट्रेलियाई हिंदुओं के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
इसी साल 19 नवंबर को विक्टोरिया की राजधानी मेलबर्न में भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय द्वारा आयोजित एक धार्मिक आयोजन को खालिस्तानी समर्थकों ने ‘हाईजेक’ कर लिया था। बाद में पता चला कि ऑस्ट्रेलियाई लेबर पार्टी का एक सदस्य, जो राष्ट्रीय स्तर पर और विक्टोरिया में भी सत्ताधारी दल है, इसके पीछे था।
इससे अमेरिका में बैठे सिख फॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू को अपना आधार ऑस्ट्रेलिया में मिल गया। टोरंटो में रेफरेंडम 2020 करवाने के बाद पन्नू ने 29 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया को रेफरेंडम के लिए चुन लिया और इसकी जल्दबाजी में घोषणा भी कर दी।
मिली जानकारी के मुताबिक मार्च में जो धार्मिक कार्यक्रम हुआ उसमें अलगाववादी नारों वाली टी-शर्ट, पुस्तिकाएं और खालिस्तानी झंडे बांटे गए। यह समागम विक्टोरियन सिख गुरुद्वारा कमेटी द्वारा करवाया गया था, जो विक्टोरिया में 7 सिख गुरुद्वारों का प्रतिनिधित्व करता है और 2019 से नगर कीर्तन का आयोजन कर रहा है। इस दौरान चरमपंथियों को खालिस्तानी झंडे के साथ मार्च करते देखा गया। बाद में सामने आया कि समागम को हाईजेक करने वाले कोई साधारण आदमी नहीं थे, बल्कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन एसएफजे के सदस्य थे। इसे लेकर मामला खूब उछला और बाद में सत्ताधारी पार्टी से जुड़े अमृतवीर सिंह का नाम सामने आया, जिसने उनको समागम में आने के लिए परमिशन दिलाई थी। 10 जुलाई, 2019 को भारत सरकार द्वारा एसएफजे पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। भारत ने जुलाई 2020 में सिख फॉर जस्टिस के संस्थापक, गुरपतवंत सिंह पन्नू को एक आतंकवादी घोषित किया था। उसी महीने सिख फॉर जस्टिस की 40 वेबसाइटों को भारत सरकार द्वारा ब्लॉक कर दिया गया था। मामले को लेकर विक्टोरिया सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी व अमृतवीर सिंह के बीच वाद विवाद भी हुआ।
दक्षिणपूर्वी मेलबर्न निवासी अमृतवीर सिंह के विक्टोरिया में सत्ताधारी ऑस्ट्रेलियन लेबर पार्टी (एएलपी) से अच्छे संबंध हैं। 2020 के मध्य तक, अमृतवीर ने एएलपी सांसद ब्रूस जूलियन हिल के कार्यालय में चुनावी कर्मचारी के रूप में काम किया। सितंबर और दिसंबर 2018 के बीच पार्टी के चुनाव अभियान समन्वयक के रूप में काम किया। ऑस्ट्रेलिया में रेफरेंडम से चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
ऑस्ट्रेलिया निवासी मनोज का कहना है कि यहां सब कुछ ठीक ठाक था लेकिन रेफरेंडम की घोषणा की बाद चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। कनाडा में क्या हाल हो रहा है, यहां पर सब शांतिपूर्वक है और हिंदु सिखों में भाईचारक सांझ है लेकिन कट्टरपंथियों के कारण तनाव भी पैदा हो सकता है। वहीं ऑस्ट्रेलिया में कारोबार करने वाले शालू आहलूवालिया का कहना है कि भारत ऑस्ट्रेलिया के संबंध काफी मधुर हैं इसमें खटास आ सकती है। भारत से भारी संख्या में छात्र शिक्षा ग्रहण करने आ रहे हैं और उनके वीजा के अलावा पीआर पर भी असर होगा। हालांकि ऑस्ट्रेलिया सरकार अभी से चौकन्नी हो गई है और वीजा देने से पहले पूरी चौकसी बरतनी शुरू कर दी है।
जालंधर से ऑस्ट्रेलिया के लिए स्टडी वीजा के एक्सपर्ट सुकांत का तर्क है कि आज भी भारी संख्या में लोग कनाडा के स्थान पर ऑस्ट्रेलिया का चयन करते हैं। कारण वहां पर आय भी अच्छी है और माहौल भी शांतिपूर्वक है।