कारपोरेट जगत के नामी हवेली ग्रुप को लेकर विवाद और गहरा गया है। हरीश जैन
ने आरोप लगाया है कि उसे धोखे से कंपनी से चलता कर दिया गया और पुलिस ने
उसकी एक तक नहीं सुनी और झूठी शिकायत देने का मामला दर्ज कर चालान कोर्ट
में दायर कर दिया, जिसका पता ही नहीं चला।
हरीश जैन ने आरोप लगाया
कि करोड़ों रुपये के हवेली ग्रुप में इस गड़बड़ी में उसके भाई सतीश जैन की
मदद कांग्रेसी नेता कर रहे हैं, जिनका संबंध शिरोमणि अकाली दल से है।
मीडिया
से बातचीत में हरीश जैन ने बताया कि उनके परिवार ने 1996 में आशा बिल्डर्स
व आशा शोपरज नाम से दो कंपनियां बनाईं थीं, जिसने हवेली रेस्तरा व अन्य
कारोबार शुरू किए थे। कंपनियों कारपोरेट अफेयर्स से मान्यता मिली थी। कई सौ
करोड़ की कंपनियां जब बन गई तो अचानक सितंबर 2015 में पता चला कि वह 2011
से कंपनी के डायरेक्टर के पद से रिजाइन कर चुके हैं। इस पर उन्होंने आठ
सितंबर 2015 को जालंधर पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, जिसकी जांच एसीपी
सेंट्रल देवदत्त शर्मा को सौंपी गई।
उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिली
कब जांच पूरी हुई, कब मुझे झूठा साबित कर 182 के तहत रपट दर्ज कर ली गई और
चुपचाप कोर्ट में चालान पेश कर दिया गया। हरीश ने कहा कि वह पुलिस के पास
गए थे ताकि आरटीआई के माध्यम से मामले की जानकारी ले सकें लेकिन उन्हें
जानकारी ही नहीं दी गई। वह कोर्ट में क्रिमनल इस्तगासा दायर करने गए तो पता
चला कि पुलिस ने उनके खिलाफ झूठी शिकायत करने का चालान दायर कर रखा है,
जोकि 13 अक्तूबर को कोर्ट में जमा हो चुका है।
हरीश जैन ने कहा कि
उसका भाई सतीश जैन करोड़ों रुपये हड़प गए। पुलिस ने उसकी एक नहीं सुनी,
सतीश की मदद एक कांग्रेसी नेता कर रहा है, जिसका इन दिनों शिअद से गहरा
संबंध है। हरीश ने सीए सुरिंदर महाजन पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने भी इस
गड़बड़ी में भाई सतीश जैन की मदद की है।
हवेली कारपोरेट ग्रुप के
एमडी सतीश जैन ने कहा कि हरीश जैन झूठी शिकायतें दायर कर रहा है। पुलिस की
जांच में वह झूठा पाया जा चुका है और पुलिस ने ही झूठी शिकायत करने के आरोप
में उसको आरोपी बनाकर कोर्ट में चालान दायर किया है। हरीश जैन सिर्फ बदनाम
करने के लिए आरोप लगा रहा है। कंपनी के सीए सुरिंदर महाजन का कहना है कि
हरीश जैन मनगढ़ंत आरोप लगा रहा है।
उसका इसमें क्या लेना देना है।
उन्होंने कोई दस्तावेज हरीश जैन से हस्ताक्षर नहीं कराया है। कंपनी
सेक्रेटरी ही कारपोरेट जगत में सब कुछ तय करता है, इसमें सीए का कोई रोल
नहीं होता।