मोगा के लोक निर्माण विभाग के रेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते जस्टिस वीके बाली।
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ऑर्बिट बस कांड की जांच कर रहे जस्टिस वीके बाली आयोग को राज्य सरकार ने पंजाब में बस यात्रियों की सुरक्षा और निजी ट्रांसपोर्ट को लाइन पर लाने के लिए सुझाव देने की और जिम्मेदारी दी गई है। वहीं मोगा ऑर्बिट बस कांड की जांच लगभग पूरी हो गई है। इसी माह में आयोग अपनी रिपोर्ट पंजाब सरकार को सौंप देगा।
जस्टिस वीके बाली आयोग ने आम लोगों के अलावा ट्रांसपोटरों से बसों में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा के अलावा बसों की समय सारिणी को नियमित करने की सलाह एवं सुझाव मांगें गए हैं। यह भी सलाह एवं सुझाव मांगें गए हैं कि किस तरह से बड़ी गाड़ियों, बसों की उन खतरनाक और लापरवाही को रोका जा सकता है और यात्रियों की सुरक्षा संबंधित क्या समाधान किये जा सकते हैं।
अगर कोई घटना घटती है तो बस मालिक या स्टाफ या संबंधित की किस तरह से जिम्मेदारी बांधी जा सकती है। इसके अलावा बसों में काम करते अमले को उन्हें सही ड्यूटी और सवारियों से अच्छा व्यवहार करने संबंधित कैसे प्रशिक्षण दिया जा सकता है। ऐसे मुद्दों की सलाह एवं सुझाव एक माह के अंदर चंडीगढ़ स्थित आयोग दफ्तर में देने की अपील की है।
बीते माह की 20 फरवरी को मृतक लड़की की मां छिंदर कौर आयोग सामने पेश होकर अपना बयान दर्ज करवा चुकी हैं। उनके पेश हो जाने के बाद जांच लगभग पूरी हो गई है। इस माह में आयोग अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप देगा। दूसरी ओर एडिशनल जिला एवं सेशन जज गुरजंट सिंह की अदालत में इस केस की अगली सुनवाई 25 मार्च तय की गई है।
इस तारीख पर मृतक लड़की अर्शदीप कौर के नाबालिग भाई अकाशदीप सिंह को गवाही के लिए अदालत ने तलब किया हुआ है। थाना बाघापुराना पुलिस ने इस मामले में मृतक लड़की की मां छिंदर कौर के बयान पर रणजीत सिंह निवासी बठिंडा, सुखविंदर सिंह उर्फ पंमा निवासी बहावल वाली थाना अबोहर जिला फाजिल्का, गुरदीप सिंह उर्फ जिम्मी निवासी दशमेश नगर मोगा और अमर राज उर्फ दाना निवासी चक बखतू जिला बठिंडा के खिलाफ केस दर्ज किया था।