फिरोजपुर में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष पट्टी बिला गांव में स्थिति का जायजा लेते हुए।
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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग ने उपमंडल के गांव पट्टी बिला के दलित नत्था सिंह की ओर से आत्महत्या व फाजिल्का उपजेल में बंद शराब व्यवसायी व अकाली नेता शिव लाल डोडा और उनके समर्थकों द्वारा नेचरवे हाइट्स के अध्यक्ष नीरज ठठई पर हमले का गंभीर नोटिस लेते हुए पंजाब पुलिस के महानिदेशक व प्रधान गृह सचिव को बुधवार को चंडीगढ़ तलब किया है।
शुक्रवार को पट्टी बिला गांव में स्थिति का जायजा लेने के लिए पहुंचे आयोग के उपाध्यक्ष डा. राजकुमार वेरका ने कहा कि पट्टी बिला के दलित नत्था सिंह को कुछ लोगों ने अपमानित करके गांव छोड़ने पर मजबूर किया। उसने आत्मग्लानि के कारण धरांगवाला गांव के सेमनाले पर जाकर एक मई को आत्महत्या कर ली। इस प्रकरण में आयोग के आदेशों के बावजूद अबोहर पुलिस ने केवल एक किन्नर को ही गिरफ्तार किया, जबकि बाकी नामजद आरोपी अभी तक फरार हैं। प्रथम दृष्टा जांच में यह बात सामने आई है कि इस मामले में पूर्व सरपंच रोशन सिंह का हाथ था। यदि पुलिस अधिकारियों ने 7 दिन में सभी आरोपियों को गिरफ्तार ना किया तो उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जायेगी।
सभा के दौरान अबोहर के दलित युवक भीम टांक को शराब व्यवसायी व अकाली दल के पूर्व हलका इंचार्ज शिव लाल डोडा के रामसरा स्थित फार्म हाउस में बुलाकर उसका कत्ल करने और गुरजंट सिंह जंटा पर कातिलाना हमला करने के बारे में अब तक की कार्रवाई की जानकारी भीम की मां कौशल्या देवी ने डा. वेरका को बताई। डा. वेरका ने कहा कि 2 दिन पूर्व फाजिल्का उपजेल में उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल के ओएसडी सतिंदर जीत सिंह मंटा व उसके साथियों ने डोडा व ठठई के बीच समझौता करने के बहाने प्रवेश किया और वहीं न्यायिक हिरासत में बंद नीरज ठठई पर हमला किया गया। जेल अधिकारियों ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने के बजाय नीरज को फिरोजपुर जेल में स्थानांतरित कर दिया।
उन्होंने कहा कि भीम टांक के परिवार ने शुरू से ही आशंका व्यक्त की थी कि यदि शिव लाल डोडा को फाजिल्का उपजेल में रखा गया तो कोई ना कोई घटना हो सकती है। तमाम नियमों व कायदे कानून को ताक पर रखकर पिछले 4 माह से शिव लाल डोडा को गंभीर अपराध में संलिप्त होने के बावजूद उपजेल में सुविधाएं दी जा रही हैं।
डा. वेरका ने कहा कि उपजेल में नीरज ठठई पर हमला करने के मामले में उपमुख्यमंत्री के ओएसडी मंटा सहित सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और इन्हें जेल में घुसने की अनुमति देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध भी तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए।