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अध्यापिका के यौन शौषण मामले की जांच को एसआईटी गठित

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अध्यापिका के यौन शौषण मामले की जांच को एसआईटी गठित
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डीजीपी ने आईजीपी क्राइम को सौंपी केस की पड़ताल
13 को पीड़ित व आरोपी पक्ष चंडीगढ़ तलब
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदकोट।
पंजाब के डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने फरीदकोट में एक स्कूल अध्यापिका के यौन शौषण मामले की जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम(एसआईटी) का गठन कर दिया है। पीड़ित अध्यापिका ने इंसाफ के लिए नेशनल शेड्यूल कास्ट अलायंस संस्था के माध्यम से डीजीपी के पास लिखित शिकायत सौंपी थी जिसके आधार पर उन्होंने इस केस की जांच के लिए इंस्पेक्टर जनरल आफ पुलिस (क्राइम) विधु राज की अध्यक्षता में एसआईटी गठित कर दी है। डीजीपी के निर्देश पर गठित एसआईटी प्रमुख इस केस से सम्बंधित पीड़ित अध्यापिका के अलावा आरोपी स्कूल चेयरमैन नरिन्द्र सिंह रंधावा व उसके बेटे जसमीत सिंह रंधावा को 13 फरवरी को चंडीगढ़ स्थित अपने दफ्तर में तलब कर लिया है।
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जानकारी के अनुसार यह केस पिछले साल 6 सितंबर को थाना सदर कोटकपूरा में दर्ज हुआ था। जिसमें स्कूल की एक अध्यापिका के यौन शौषण करने के आरोप में स्कूल का संचालन कर रही सुख सागर सोसायटी के चेयरमैन नरिन्द्र सिंह रंधावा व उसके बेटे जसमीत सिंह रंधावा के खिलाफ सामूहिक दुराचार का केस दर्ज किया है। दोनों के खिलाफ अध्यापिका से अश्लील हरकतें करने, नौकरी स्थाई कराने के नाम पर एक लाख रुपये की वसूली करने और बेवजह एक माह का वेतन रोकने के मामले में भी धाराएं लगाई थी। शिकायत के अनुसार 1 अक्तूबर 2016 को अध्यापिका की स्कूल हाजिरी लगवा दी थी लेकिन अक्तूबर माह का वेतन चेयरमैन ने अपने पास रख लिया था। चेयरमैन अक्सर ही अध्यापिका को अपने दफ्तर में बुलाकर उसकी साथ अश्लील हरकतें करने लगा। साल 2016 में ही 8 नवबंर को वह अध्यापिका को अपनी कोठी पर ले गया और वहां उसे जबरन शराब पिलाकर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए और अगले दिन धमकी दी कि यदि उसने किसी को बताया कि वह उसे नौकरी से निकाल देगा। कुछ समय पहले अप्रैल माह में जब चेयरमैन जेल में बंद था तो उसके बेटे जसमीत सिंह ने उसे अपने साथ उनकी कोठी में रखा और जबरन शारीरिक संबंध बनाता रहा। पुलिस ने शिकायत के आधार पर चेयरमैन नरिन्द्र सिंह रंधावा व उसके बेटे जसमीत सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया था। मालूम होकि केस दर्ज होने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार न करने के रोष स्वरूप पीड़ित अध्यापिका ने जहर पीकर जान देने की भी कोशिश की थी लेकिन उसे समय पर अस्पताल दाखिल करवाए जाने पर उसकी जान बच गई थी। बाद में दोनों आरोपियों को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी। पीड़िता का आरोप है कि उस पर समझौता करने का दबाव डाला जा रहा है जिसके तहत ही 19 नवंबर को थानाच सदर कोटकपूरा में उसके खिलाफ मारपीट का झूठा केस भी दर्ज करवाया गया।
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