जाली दस्तावेज पर अपने नाम पर करवाई बुजुर्ग की जायदाद
अदालत में पहुंचा पीड़ित 78 वर्षीय संत प्रकाश सिंह, जमीन पर आगे बेचने पर रोक
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदकोट। यहां के सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में एक धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें फिरोजपुर निवासी एक व्यक्ति ने फरीदकोट के एक बुजुर्ग को अविवाहित व मृतक करार देकर गांव मुमारा स्थित करीब 5 करोड़ मुल्य वाली 272 कनाल 15 मरले जमीन को धोखे से अपने नाम करा लिया। अदालत में पेश हुए फरीदकोट निवासी बुजुर्ग संत प्रकाश सिंह ने ना सिर्फ खुद के जिंदा होने की दस्तावेज पेश किए हैं और खुद के विवाहित होने और दो बेटियों व एक बेटे का पिता होने का दावा किया है। बुजुर्ग की याचिका पर अदालत ने उसकी जमीन पर आगे किसी को बेचने पर रोक लगा दी है।
अदालत में दायर याचिका में संत प्रकाश सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले वह माल विभाग से अपनी जमीन के बारे में दस्तावेज लेने गया था, जहां से उसे जानकारी मिली कि उसकी जमीन को सीजेएम फरीदकोट की अदालत की ओर से 21 दिसंबर 2017 को दिए आदेश पर जसवंत सिंह नामक व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर किया जा चुका है। सीजेएम की अदालत के आदेश को देखने पर जानकारी मिली कि फिरोजपुर के गांव लोहके निवासी जसवंत सिंह व पाला सिंह नामक दो व्यक्तियों ने 2 मई 2017 को अदालत में केस दायर करते मुझे अविवाहित व मृतक करार देते हुए मेरी जायदाद पर अपना हक जताया था। इसके लिए नगर काउंसिल फिरोजपुर द्वारा जारी मौत का प्रमाण पत्र पेश किया गया। जसवंत सिंह ने कहा कि संत प्रकाश सिंह की मौत उसके आवास पर हुई और उसने 7 अप्रैल 2012 को वसीयत उसके नाम पर लिखी थी। पाला सिंह का दावा था कि वह संत प्रकाश सिंह का भतीजा है। बाद में दोनों ने अदालत में समझौता कर लिया और पाला सिंह ने अपना दावा छोड़ते हुए जमीन को जसवंत सिंह के नाम करवा दिया। जसवंत सिंह व पाला सिंह की कहानी को झूठी करार देते हुए संत प्रकाश सिंह ने अदालत से अपनी जमीन वापस करवाने की मांग की है, जिसके लिए उसने अपने जीवित होने से लेकर विवाहित होने तक के सबूत पेश किए। अदालत ने जमीन बेचने के साथ उस पर किसी भी तरह का कर्ज लेने पर भी पाबंदी लगा दी है। उधर, इस मामले में जसवंत सिंह का दावा है कि अदालत में पेश हुआ व्यक्ति,असली संत प्रकाश सिंह नहीं है। जबकि संत प्रकाश सिंह के दस्तावेजों पर उसके पिता व दादा के नाम भी वही है और तीनों नाम का सेम होना स्वाभाविक नहीं हो सकता।