चालान पेश नहीं, जग्गी जौहल और तलजीत सिंह को जमानत
आतंकियों को फंडिंग और हथियार सप्लाई करने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदकोट। अदालत ने टारगेट किलिंग से जुड़े खालिस्तानी आतंकी संगठनों को फंडिंग और हथियार सप्लाई करने के आरोपों का सामना कर रहे एनआरआई जगजीत सिंह जग्गी जौहल और उसके साथी तलजीत सिंह को फरीदकोट से संबंधित एक आपराधिक केस में जमानत दे दी है। जौहल के खिलाफ अब भी राज्य भर में करीब सात अन्य मामले लंबित है जिसके कारण अभी उनकी जेल से रिहाई नहीं हो पाएगी। उसके दूसरे साथी तलजीत सिंह की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। यह मामला जून 2017 में थाना बाजाखाना में दर्ज हुआ था, जिसमें मुख्य आरोपी संदिग्ध आतंकी गुरप्रीत सिंह प्रीत को भी पहले ही जमानत मिली हुई है जबकि एक आरोपी त्रिलोक सिंह अभी भगोड़ा है। देश विरोधी गतिविधियों में शमूलित होने के चलते जगजीत सिंह जग्गी जौहल से संबंधित केस राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के विचाराधीन हैं और वह इन केसों की सुनवाई राज्य से बाहर करवाने के प्रयास कर रही है।
जानकारी के अनुसार 21 मई 2017 को अमृतसर में कमालपुर के धंसी बांधके पास से सीमा सुरक्षा बल ने इनोवा गाड़ी में सवार निहंग सिंह की वेशभूषा में दो संदिग्ध आतंकियों मान सिंह गुरदासपुर और शेर सिंह उर्फ सरबजीत सिंह जालंधर को हथियारों के साथ काबू किया था। बाद में उन्हें अमृतसर के थाना रामदास पुलिस के हवाले कर दिया गया और पुलिस ने पूरे मामले की जांच स्टेट स्पेशल सेल के हवाले कर दी। स्पेशल सेल ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों की पूछताछ और जांच के आधार पर 21 जून को फरीदकोट के गांव जीवनवाला निवासी गुरप्रीत सिंह प्रीत और मोगा के गांव कमालपुर निवासी सिमरनजीत सिंह को भी हथियारों के साथ गिरफ्तार किया। जांच प्रक्रिया के दौरान स्पेशल सेल की टीम गुरप्रीत सिंह उर्फ प्रीत को उसके जीवनवाला स्थित घर लेकर पहुंची और उसके घर के तूड़ी वाले कमरे में छिपा कर रखी 32 बोर की देसी रिवाल्वर व 5 कारतूस बरामद किए थे। इस मामले में गुरप्रीत सिंह प्रीत के खिलाफ थाना बाजाखाना में असलहा एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था और बाद में जांच में स्पेशल सेल ने इस केस में जग्गी जौहल व उसके साथियों तलजीत सिंह व त्रिलोक सिंह को भी नामजद किया था। इन तीनों पर आरोप है कि इन्होंने आतंकियों को हथियार उपलब्ध करवाए थे। ऐसे केसों में 90 दिनों में जांच पूरी करके चालान पेश करना होता है लेकिन स्टेट स्पेशल सेल अपनी जांच तय समय में पूरी करके चालान नहीं पेश नहीं कर सकी। जिसके आधार पर उन्हें जमानत मिल गई।