फरीदकोट। बहुचर्चित नाबालिग छात्रा अपहरण व दुराचार मामले में दोषी निशान सिंह व उसकी माता नवजोत कौर को पीड़िता को 50 लाख और उसके माता पिता को 20-20 लाख रुपये मुआवजा अदा करने के आदेश जारी हुए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर जिला कलेक्टर फरीदकोट को दोनों दोषियों की संपत्ति अटैच करके उसे नीलाम भी कर दिया था जिसे इंडियन रेडक्रास सोसायटी की फरीदकोट ब्रांच ने खरीदा था। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत के बाद रिहा हुई निशान सिंह की माता नवजोत कौर ने अपनी नीलाम हो चुकी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया। इस मामले में थाना कोतवाली पुलिस ने रेडक्रास सचिव की शिकायत पर नवजोत कौर के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करके कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस को सौंपी शिकायत में रेडक्रास सचिव ने बताया कि जिला कलेक्टर ने पिछले साल सितंबर के दौरान एक केस की वजह से बाबा फरीद सभ्याचारक केंद्र के पास अटैच की गई 36 कनाल 14 मरले जमीन की नीलामी रखी थी जिसे रेडक्रास ने खरीदा था। इस जमीन पर नवजोत कौर समेत अज्ञात व्यक्तियों ने कब्जा करने की कोशिश की है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने नवजोत कौर व अज्ञात पर केस दर्ज करके कार्रवाई शुरू कर दी है।
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मालूम होकि प्रदेश भर में चर्चित रहा फरीदकोट का छात्रा अपहरण कांड 24 सितंबर 2012 को पेश आया था। उस दिन निशान सिंह नामक कुख्यात नौजवान अपने साथियों के मिलकर हथियारों के बल पर नाबालिग छात्रा को उसके घर से जबरन उठाकर ले गया था और इस घटनाक्रम में छात्रा के माता पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना से करीब एक साल पहले भी निशान सिंह, उक्त छात्रा को अपहरण करके ले गया था जिसमें उसके खिलाफ अपहरण व दूराचार का केस दर्ज हुआ था लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया था जिसके चलते उसने दूसरी बार फिर से उसी छात्रा का अपहरण कर लिया। इस घटना को लेकर करीब एक माह तक चले आंदोलन के बाद पुलिस ने निशान को गोवा से गिरफ्तार किया और केस में उसकी माता नवजोत कौर समेत बाकी साथियों को नामजद किया गया। दोनों केसों में जिला अदालत ने साल 2013 में निशान सिंह को उम्रकैद और बाकी दोषियों को 7-7 साल की सजा सुनाई। इस सजा के खिलाफ निशान सिंह व उसकी मां नवजोत कौर ने पंजाब हाईकोर्ट में अपील दायर की थी जिसपर सुनवाई के बाद अदालत ने उसे खारिज कर दिया। साथ ही उन्हें पीड़ित परिवार को 90 लाख मुआवजा अदा करने के आदेश जारी किए थे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने निशान सिंह की मां नवजोत कौर को जमानत दे दी थी और केस का फैसला होने पर उनकी नीलाम हो चुकी जमीन को आगे ना बेचने व उस पर किसी भी तरह का कोई निर्माण करने पर भी पाबंदी लगा दी थी।
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