जाली बिलों की चल रही है जांच: सीनियर डीसीएम
जांच से पहले कुछ नहीं कह सकते, घोटाला कितने का है, इसके लिए वक्त चाहिए
अधिकारी ने कहा क्लर्क ने मकानों की खरीद-फरोख्त की एनओसी ली है या नहीं इसकी करेंगे जांच
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर।
कामर्शियल विभाग के एक क्लर्क द्वारा जाली क्लींस बिलों को पास कर हेराफेरी किए जाने के मामले में रविवार रेल डिवीजन फिरोजपुर के सीनियर डिवीजनल कामर्शियल मैनेजर (सीनियर डीसीएम) मोनू लुथरा ने प्रेसवार्ता कर सफाई दी कि इस हेराफेरी मामले में उनके पास एक शिकायत पत्र आया है, जो जांच-पड़ताल की जा रही है। जांच-पड़ताल के बाद ही बताया जा सकता है कि कितनी धनराशि का घोटाला है, अभी इसे घोटाला नहीं कहा जा सकता है। साथ में यह भी कहा कि उक्त विभाग कामर्शियल विभाग से नहीं जुड़ा है, लेकिन कामर्शियल विभाग का क्लर्क क्लींस बिलों का कामकाज देख रहा है। लुथरा ने कहा कि क्लर्क द्वारा जमीन खरीद कर कोठी बनाकर खरीद-फरोख्त के मामले में उसने विभाग से एनओसी ली है या नहीं इस संबंधी जांच करेंगे और एनओसी नहीं ली तो चार्जशीट देंगे।
एक शिकायत के आधार पर कई समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित हुई थी कि कामर्शियल के एक क्लर्क ने जाली क्लींस बिल पास कर करोड़ों का घोटाला किया है। यह शिकायत रेलवे अधिकारियों व दिल्ली के रेल अधिकारियों के पास भी पहुंची थी। लेकिन अधिकारियों ने शिकायत फाइलों में दबा कर रखी थी। जब खबर प्रकाशित हुई तो अधिकारी मानने को तैयार नहीं थे कि उनके पास कोई शिकायत आई है। जब मामला तूल लेने लगा और फिरोजपुर डिवीजन की बेइज्जती होने लगी तो अधिकारियों ने रविवार पत्रकारों को बुलाकर कहा कि खबर जो प्रकाशित हुई है, उसे हम घोटाला नहीं कह सकते। अधिकारी ने यह भी स्वीकार किया कि उनके पास शिकायत आई है, हम जांच पड़ताल कर रहे हैं।
डेढ़ घंटे प्रेसवार्ता में सवाल-जवाब के चले तीर
डीआरएम आफिस में सीनियर डीसीएम के कमरे में लगभग डेढ़ घंटे चली प्रेसवार्ता में पत्रकारों के सवालों और अधिकारी के जवाबों के तीर चले। एक पत्रकार ने कहा कि जिस क्लर्क की बात कही जा रही है, उसके रेलवे क्लब में तैनाती के दौरान के बिलों की जांच करवा लें पता चल जाएगा, कितनी की हेराफेरी हुई, इस पर सीनियर डीसीएम ने जवाब दिया वो रेलवे से संबंधित नहीं है, अधिकारियों की तरफ से पैसे एकत्र होते हैं और नौकरी के बाद क्लर्क उस कार्य को देखता है। उसके बाद एक और पत्रकार ने कहा कि पार्सल विभाग में बहुत गलत चल रहा है, जिस कर्मचारी ने आपने तबादले के आदेश की बात कही थी वो अभी तक वहीं पर तैनात है, और दबाकर हेराफेरी हो रही है, इस पर पत्रकार ने सबूत भी देने की बात कही। अधिकारी ने तुरंत मोबाइल फोन कर पता लगाया तो यह बात सच साबित हुई कि जिस कर्मी का तबादला किया था वो तो वहीं पर तैनात है। इसी तरह एक पत्रकार ने पंजाब मेल (फिरोजपुर-मुंबई के बीच चलने वाली) में टिकट निरीक्षकों द्वारा यात्रियों से पैसे लेने संबंधी सवाल किया। इस पर अधिकारी ने कहा आप ने बता दिया है इसकी जांच करेंगे। अधिकारी ने यह भी स्वीकार किया जिस क्लर्क पर क्लींस बिलों की हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं, उसका तीन साल पहले तबादला हुआ था, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते उसे फिर वहीं दोबारा लगा दिया गया था। दस दिन पहले उक्त क्लर्क का कोई तबादला नहीं किया है।